सबसे बड़ा धन
एक समृद्ध गाँव में एक सेठ रहता था। हवेली ऊँची, तिजोरियाँ भरी हुई, नौकर-चाकरों की कतार लगी रहती थी। धन की कोई कमी नहीं थी। लेकिन उस सेठ के जीवन में एक बड़ी कमी थी—परिश्रम की। वह इतना आलसी था कि पानी का गिलास भी खुद उठाकर नहीं पीता था। सुबह देर तक सोना, दिन भर बिस्तर पर पड़े रहना, रात को दावतें और ऐशो-आराम—बस यही दिनचर्या थी।