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Top 10 Mistakes in Literary Content Writing
Introduction Writing literary content is a craft that combines creativity with skill. Whether you are penning a poem, a short story, or a novel, the process involves avoiding common pitfalls that can undermine your work. Literary content deserves attention to detail and a deep understanding of the art of storytelling. This article will explore the top 10 mistakes in literary content writing and provide insights on how to avoid them. Ignoring the Importance of Structure A wel
अविरति गौतम
Mar 92 min read


हीरे की पहचान
जो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में तुरंत गरम हो जाए, क्रोधित हो जाए, उलझ जाए— वह काँच के समान है।
लेकिन जो कठिन परिस्थितियों में भी शांत और स्थिर बना रहे— वही सच्चा हीरा होता है।”
उस दिन राजा के दरबार में केवल हीरे की ही नहीं, बल्कि मानव-स्वभाव की सच्ची पहचान भी हो गई।
रामकुमार वर्मा
Mar 84 min read


चोर का दान
गरीब भावुक हो गया, "सेठ जी, आप बहुत अच्छे हैं।"
सेठ ने कहा, "न मैं अच्छा हूँ, न तुम। अच्छा तो वह चोर था, जिसने रुक्मणि की शादी की चिंता कर ली। काश, दुनिया में ऐसे भले चोर और होते!"
यह कहते हुए सेठ ने गरीब को गले से लगा लिया
मंजुला अवस्थी
Mar 73 min read


व्यक्ति की पहचान
अब महात्मा जी बोले कि चीजें जैसी ऊपर से दिखती हैं, अंदर से वैसी नहीं होती। ये कोई मामूली अंगूठी नहीं है बल्कि ये एक हीरे की अंगूठी है जिसकी पहचान केवल सुनार ही कर सकता था।
इसलिए वह 5 माला देने को तैयार हो गया। ठीक वैसे ही मेरी वेशभूषा को देखकर तुम मुझसे प्रभावित नहीं हुए। लेकिन ज्ञान का प्रकाश लोगों को मेरी ओर खींच लाता है। व्यक्ति महात्मा जी की बातें सुनकर बड़ा शर्मिंदा हुआ।
शिक्षा:- कपड़ों से व्यक्ति की पहचान नहीं होती बल्कि आचरण और ज्ञान से व्यक्ति की पहचान होती है।
लक्ष्मी मिश्रा
Mar 62 min read


छोटी बहन
मैंने कहा, "पापा, आप भी तो मेरी भलाई के लिए ही चिंतित थे।" पापा ने एक बार फिर से मुझे सीने से लगा लिया और इस बार मम्मी और छोटी बहन भी आकर मुझसे लिपट गईं।
दोस्तो, मुझे मेरे पापा ने बचपन से लेकर आज तक एक बात ही सिखाई है, "अकेली लड़की मौका नहीं, जिम्मेदारी होती है हमारी।
रमेश मिश्रा
Mar 54 min read


ठाकुर का कुआँ
गंगी प्रतिदिन शाम पानी भर लिया करती थी। कुआँ दूर था, बार-बार जाना मुश्किल था। कल वह पानी लाई, तो उसमें बू बिलकुल न थी, आज पानी में बदबू कैसी ! लोटा नाक से लगाया, तो सचमुच बदबू थी। ज़रुर कोई जानवर कुएँ में गिरकर मर गया होगा, मगर दूसरा पानी आवे कहाँ से? ठाकुर के कुएँ पर कौन चढ़ने देगा? दूर से लोग डाँट बताएँगे। साहू का कुआँ गाँव के उस सिरे पर है, परंतु वहाँ भी कौन पानी भरने देगा? कोई तीसरा कुआँ गाँव में है नहीं।
प्रेमचंद
Mar 24 min read


हनुमान की खोज
बचपन में माँ की गोद में बैठकर उन्होंने रामायण की जो अपूर्व हृदयाकर्षक कहानी सुनी थी, वह दांपत्य जीवन के दुखमव अनुभव से व्यक्ति सईस की तिक वाणी से अचानक मलिन हो जाने पर भी कभी भी हृदय से मिट नहीं सकी, बल्कि पश्चिमी जीवन के आदर्श के संघर्ष में वह और अधिक स्पष्ट हो गई थी। खासकर रामायण के हनुमान का चरित्र उन्हें बाल्यकाल में बहुत ही आकृष्ट करता था। महावीर हनुमान का आदर्श उनके हृदय में सदैव देदीप्यमान रहता तथा रामायण-गान का समाचार पाते ही वे उसे सुनने दौड़ पड़ते थे।
मुकेश ‘नादान’
Mar 21 min read


गलियों में इंसानियत
निर्मल ने महसूस किया कि जीवन का असली सुख वही है, जहां इंसान अपने दिल की सुनता है, सही निर्णय करता है और दूसरों के लिए ईमानदारी और स्नेह रखता है। धीरे-धीरे उनके घर में खुशियों की गूंज बढ़ती गई। राधिका ने अपने बच्चों और निर्मल के साथ हर पल का आनंद लिया। निर्मल ने उनके साथ जीवन बिताने के हर क्षण को संजोया।
राम कुमार वर्मा
Feb 274 min read


लड़की हूँ,
वो गुलशन जो, खाद-धूप को,
पाकर भी, गुलज़ार नहीं हूँ
मैं वो सपना, जो आँखों में,
आकर भी साकार नहीं हूँ
जो देखा, जो जाना,
जो महसूस किया, लफ़्ज़ों में ढाला
मैने अपनी, बात कही बस,
मैं कोई, फ़नकार नहीं हूँ
हुस्न, मौसिकी, रंग, नज़ारे,
सब कुछ ही संसार हैं उसका
आँचल सक्सैना
Feb 261 min read


बेचारे पतिदेव
मजदूर दिवस की असली बधाई उसी को मिलनी चाहिए, जो रोज़ बिना वेतन, बिना छुट्टी, बिना शिकायत घर को “घर” बनाए रखता है।
श्री प्रसाद चौरसिया
Feb 263 min read


बेशकीमती दौलत
यदि आपका जीवनसाथी आज आपके पास है, तो उसका सम्मान कीजिए, उसकी भावनाओं को समझिए, और इस अनमोल रिश्ते को सहेजकर रखिए। क्योंकि सच्चा प्रेम वही है, जो समय की हर आँधी में अडिग खड़ा रहे - और अंत में यही सिद्ध करे कि दुनिया की सबसे बेशकीमती दौलत, प्यार है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 253 min read


अवीर गुलाल की होली
अगले साल से हम सब सिर्फ अवीर गुलाल से ही होली खेलेंगे। दारा शेर प्रधान मंत्री टनटन शेर की ओर से चांदी का सिल्ड और पांच हजार रूपया नगद पा कर खुशी से फुला नही समाया। पुरस्कार पाने की खुशी में सभी जानवर दारा शेर को बधाई दे कर अपने घर जाने लगे।
बद्री प्रसाद वर्मा अनजान
Feb 253 min read


एहसास एक अनुभूति
पति पत्नी का प्रेम वहीं तक
जब तक एक दूजे का साथ निभाया।
एक ने भी गर दामन छोड़ दिया
तो यह रिश्ता भी हो जाता पराया।
बबिता चौधरी "राही"
Feb 251 min read


अनपढ़ व्यापारी
यह कहानी मज़ाक में कही गई लग सकती है, पर संदेश स्पष्ट है—परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, यदि मन में लगन और हाथों में मेहनत हो, तो घंटी बजाने वाला भी एक दिन सफलता की गूंज बन सकता है।
राम प्रकाश वर्मा
Feb 232 min read


सपनों के सौदागर
यदि सपनों के सौदागर होते
हम होते नील गगन में,
मन की बातें, मन की चाहें
पूरी हो जातीं इक पल में,
हम भी बड़े महल में होते
राजकुमारी होते।
यदि सपनों के सौदागर होते
सपनों में ही रहते,
कुटिया के बर्तन भी फिर तो
सोने की सब होते,
पेड़ों पर रसगुल्ले होते
तोड़ तोड़ कर खाते।
साची सेठ
Feb 231 min read


सफलता का रहस्य
जो लोग सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं उन्हें आज नहीं तो कल सफलता मिल ही जाती है। याद रखिये कि जीवन की नाकामयाबी ही कामयाबी की तरफ बढ़ता एक कदम होता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 233 min read


अंजाने रिश्ते
डॉ मंजु सैनी एक अनजाना सा रिश्ता मन का मीत बना और फिर बिछुड़ गया एक नश्तर बन मेरे जीवन में साथ निभाने की जो बातें हुईं छोड़ गया यूँ ही क्षण भर में आज नश्तर से चुभते हैं नासूर बन छोड़ गए चिह्न जीवंत हूँ तो टीसता हैं वो दर्द नजर अंदाज करती हूँ फिर भी खामोश रह जाती हूं सोचकर शायद यही किस्मत में लिखा है बस गया था सांसों में मानो रह नही पाऊँगी उस बिन पर चल रही हैं जिंदगी यूं ही अकेले सफर में चलते चलते ही रह गया हैं मात्र यादो का कारवां शायद कभी होगा मेरी यादों को उसका सही मुकाम मुक
डॉ मंजु सैनी
Feb 221 min read


बेटी की योग्यता
अपनी संतान से प्रेम अवश्य करें, पर उसे इतना सक्षम भी बनाएं कि वह जहां जाए, वहां केवल अपने सपनों को ही नहीं, रिश्तों को भी निभा सके।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Feb 223 min read


कद्दू की तीर्थयात्रा
जब तक हमारे व्यवहार व सोच में परिवर्तन नहीं होता है हमारी तीर्थ यात्रा अधूरी ही मानी जाती है। संस्कारों में आधारभूत परिवर्तन ही तीर्थ यात्रा का वास्तविक प्रतिफल है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 222 min read


मैं शिव हो गया हूँ।
संन्यासी होने की साथ उन्हें बचपन से ही थी। एक दिन एक गेरुए वत्र को लपेटकर वे घूमने निकल रहे थे। यह देखकर माँ ने पूछा, "यह क्या रे?" वरिश्वर ने उल्लासपूर्वक ऊँचे स्वर में कहा, "मैं शिव हो गया हूँ।" उनमें ध्यान-प्रवणता भी थी। चड़ों के मुँह से उन्होंने सुना था कि ध्यान में निमग्न ऋषि-मुनियों की जटा बढ़कर धरती को छूने लगती है और धीरे-धीरे बरगद के पेड़ की जटा की तरह धरती में घुस जाती है।
मुकेश ‘नादान’
Feb 192 min read


असमय की एक कविता
आजकल एकदम खाली हूँ
इतना खाली कि मेरे हिस्से
कोई काम ही नहीं बचा,
कभी समय मुझ पर हँसता है
कभी मैं समय पर
और यह भी क्या इत्तेफाक़ है
मेरा समय सापेक्ष होना
मुझे निरपेक्षता का सिद्धान्त समझा रहा है
संदीप तोमर
Feb 192 min read


ईश्वर की कृपा
एक आश्रम में संतों की विशाल सभा लगी हुई थी। भजन, प्रवचन और शांति का वातावरण चारों ओर फैला था। किसी श्रद्धालु ने प्रेम से एक नया मिट्टी का घड़ा लाकर उसमें गंगाजल भर दिया और सभा के बीच रख दिया, ताकि जब भी किसी संत को प्यास लगे, वह गंगाजल ग्रहण कर सकें।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 123 min read


सबसे बड़ा धन
एक समृद्ध गाँव में एक सेठ रहता था। हवेली ऊँची, तिजोरियाँ भरी हुई, नौकर-चाकरों की कतार लगी रहती थी। धन की कोई कमी नहीं थी। लेकिन उस सेठ के जीवन में एक बड़ी कमी थी—परिश्रम की। वह इतना आलसी था कि पानी का गिलास भी खुद उठाकर नहीं पीता था। सुबह देर तक सोना, दिन भर बिस्तर पर पड़े रहना, रात को दावतें और ऐशो-आराम—बस यही दिनचर्या थी।
रामकिशोर वर्मा
Feb 122 min read
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