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एक चुटकी ईमानदारी
ईमानदारी बड़ी घटनाओं से नहीं, छोटे फैसलों से जन्म लेती है। जब हम दूसरों की मजबूरी का लाभ उठाना छोड़ देते हैं - तभी समाज सच में मजबूत बनता है।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
6 days ago2 min read


मुफ़्त के गुब्बारे
सच तो यह है कि मैं केवल इतना चाहता हूँ कि किसी और पिता को अपनी बेटी को इस तरह खोने का असहनीय दुःख न सहना पड़े। अगर इन गुब्बारों के बाज़ार से गायब हो जाने से किसी एक मासूम की भी जान बच जाए, तो मुझे लगेगा कि मेरी बेटी की स्मृति व्यर्थ नहीं गई।"
अजीत कुमार
Jul 134 min read


घड़ा भर बुद्धि
जैसे ही उन्होंने घड़े में झाँका उन्हें हँसी आ गयी। वे बीरबल की पीठ ठोकते हुए बोले – “मान गए भई! तुमने बुद्धि का क्या शानदार फल पेश किया है, लगता है इसे पाकर लंका के राजा के बुद्धिमान होने में तनिक भी देर नहीं लगेगी।”
अर्जुन सिवाच
Jul 43 min read


मूर्ख साधू और ठग
किसी अजनबी की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर ही उस पर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए।
विष्णु शर्मा
Jun 112 min read


सच्चा कुबेर
पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं। जल,अन्न और सुभाषित। मूर्ख लोग ही पत्थर के टुकड़ों हीरे,मोती माणिक्य आदि को रत्न कहते हैं..!!
लोकेश कुमार शर्मा
Jun 82 min read


कर्म का सिद्धांत
समय बदलता रहता है। जब भगवान् को लेना होता है तो वह कुछ भी नहीं छोड़ते, और जब देना होता है तो छप्पर फाड़ कर देते हैं। और एक बार भगवान् चाहे माफ कर दे, परंतु कर्म माफ नहीं करते।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Jun 64 min read


माँ का सम्मान
माँ का सम्मान तब कम नहीं होता जब बहुएँ उनका सम्मान नहीं करतीं, बल्कि माँ का सम्मान तब कम होता है जब बेटे अपनी माँ का सम्मान नहीं करते या उनके काम में सहयोग नहीं करते। माता-पिता से जुड़ा नाता जन्म से होता है, और उनका सम्मान करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
May 292 min read


एक रुपये का सिक्का
विवेकानन्द जी और उनकी पत्नी के चेहरे की खुशी देखते बन रही थी पर स्क्रीन के एक कोने में चुपचाप खड़ी दिख रही रंजीता की आंखों ने खुशी के आंसुओ को छिपाने से जैसे इनकार कर दिया था। पहले तो ऐसा मायका और अब ससुराल में ऐसे अनोखे परिवार को पाकर वो स्वयं को दुनिया की सबसे भाग्यशाली महिला समझ रही थी।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
May 273 min read


वाणी, चरित्र का प्रतिबिंब है।
मनुष्य जितना ही प्रिय भाषण का उच्चारण एवं श्रवण करेगा, उतना ही शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करेगा। इसके विपरीत खोटे वचन, खोटे सिक्कों के समान कार्य करते हैं। वह आप जिसको भी देंगे, वह आपको सूद समेत लौटा देगा। अतः मीठी वाणी में ही आनंद और माधुर्य है।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Apr 205 min read


सिरफिरा हाथी
हमें दूसरों कि बात का अनुसरण तो जरुर करना चाहिए मगर विशेष परिस्थिति में अपने विवेक का प्रयोग करने से नहीं चूकना चाहिए। परिस्थितियों के अनुसार निर्णय को परिवर्तित करने में ही बुद्धिमानी है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Apr 203 min read


संगत का प्रभाव
अपने बच्चों को उच्चशिक्षा के साथ साथ अच्छे संस्कार भी दीजिए ताकि वो जहां भी जाये सबका समान करे और अपने आचरण से खुद के साथ परिवार का नाम भी रोशन करे।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Apr 122 min read


अतिथि सत्कार
वह मेरा नित्य अपमान करता है तो भी मैंने उसे सौ साल तक सहा, किंतु तुम एक दिन भी न सह सके।" भगवान अंतर्धान हो गए और महात्मा जी की भी आँखें खुल गई।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Apr 81 min read


इंसानियत की पहचान
धीरे-धीरे पूरा हॉल खड़ा हो गया। सबने मिलकर उन्हें सैल्यूट किया, “जय हिंद सर!” लेकिन सबसे ज्यादा कांप रहे थे वे दो सिपाही जिन्होंने कल उन्हें अपमानित किया था।
वर्मा साहब ने उनकी ओर देखा, “माफी मांगने से ज्यादा जरूरी है सबक लेना। याद रखो जिस तरह तुमने मुझे धक्का दिया, उसी तरह तुम किसी और मजबूर इंसान को भी दे सकते हो। और तब वर्दी का सम्मान खो जाएगा।”
रामप्रसाद शर्मा
Apr 54 min read


चाट वाला
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव। एक चाट वाला था। जब भी उसके पास चाट खाने जाओ तो ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता था। कई बार उसे कहा कि भाई देर हो जाती है, जल्दी चाट लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नहीं होती। एक दिन अचानक उसके साथ मेरी कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई। तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैंने सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी भी देख ही लेते हैं। मैंने उससे एक सवाल पूछ लिया। मेरा सवाल उस चाट वाले से था कि, आदमी मेहनत से आगे
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Apr 51 min read


दगाबाज़ तीतर
बाज़ार में कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया। मानो हर व्यक्ति अपने भीतर झाँकने लगा हो।
दोस्तों : दुश्मन से बचना आसान है, पर अपनों के भेष में छिपे विश्वासघातियों से नहीं। कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं, भीतर से आता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Mar 302 min read


हीरे की पहचान
जो व्यक्ति छोटी-छोटी बातों में तुरंत गरम हो जाए, क्रोधित हो जाए, उलझ जाए— वह काँच के समान है।
लेकिन जो कठिन परिस्थितियों में भी शांत और स्थिर बना रहे— वही सच्चा हीरा होता है।”
उस दिन राजा के दरबार में केवल हीरे की ही नहीं, बल्कि मानव-स्वभाव की सच्ची पहचान भी हो गई।
रामकुमार वर्मा
Mar 84 min read


अनपढ़ व्यापारी
यह कहानी मज़ाक में कही गई लग सकती है, पर संदेश स्पष्ट है—परिस्थितियाँ चाहे जैसी भी हों, यदि मन में लगन और हाथों में मेहनत हो, तो घंटी बजाने वाला भी एक दिन सफलता की गूंज बन सकता है।
राम प्रकाश वर्मा
Feb 232 min read


सफलता का रहस्य
जो लोग सफलता प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयास करते रहते हैं उन्हें आज नहीं तो कल सफलता मिल ही जाती है। याद रखिये कि जीवन की नाकामयाबी ही कामयाबी की तरफ बढ़ता एक कदम होता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 233 min read


बेटी की योग्यता
अपनी संतान से प्रेम अवश्य करें, पर उसे इतना सक्षम भी बनाएं कि वह जहां जाए, वहां केवल अपने सपनों को ही नहीं, रिश्तों को भी निभा सके।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Feb 223 min read


कद्दू की तीर्थयात्रा
जब तक हमारे व्यवहार व सोच में परिवर्तन नहीं होता है हमारी तीर्थ यात्रा अधूरी ही मानी जाती है। संस्कारों में आधारभूत परिवर्तन ही तीर्थ यात्रा का वास्तविक प्रतिफल है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 222 min read
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