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सम्मान का अर्थ
सच्चा दांपत्य वह है जिसमें पति-पत्नी एक-दूसरे के त्याग को पहचानें, श्रेय बांटें और अधूरे सपनों को पूरा करने में समान रूप से साथ दें। घर का श्रम भले ही वेतन-पर्ची में दर्ज न हो, लेकिन परिवार की प्रत्येक सफलता पर उसकी अमिट छाप होती है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
3 days ago12 min read


अकेलेपन के उस पार
शायद सुधा माई जाते-जाते उसे यही सिखा गई थीं। और शायद रघु काका की तैंतालीस वर्षों की प्रतीक्षा भी यही कह रही थी—रिश्तों में प्रेम हो तो उसे कहने में देर मत कीजिए, दूरी हो तो उसे मिटाने में अहंकार मत लाइए, और अकेलापन हो तो उससे भागने के बजाय सबसे पहले अपने भीतर लौटना सीखिए। क्योंकि कभी-कभी जिस साथी को हम पूरी दुनिया में खोजते रहते हैं, उससे हमारी पहली मुलाकात—अपने ही भीतर होनी बाकी होती है।
लावण्या नायडू
Oct 512 min read


जाने से पहले
सच्चा प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं है। कभी-कभी प्रेम का सबसे बड़ा रूप यह होता है कि मनुष्य अपने न रहने की स्थिति में भी अपनों के लिए सुरक्षित भविष्य की व्यवस्था कर जाए। महेश अपने परिवार के साथ अधिक समय नहीं रह सका, लेकिन जाने से पहले वह इतना कर गया कि उसके बाद भी उसके अपने अकेले न रहें। और शायद प्रेम की सबसे सुंदर परिभाषा भी यही है— स्वयं चले जाना, लेकिन अपनों के लिए पीछे एक ऐसा सहारा छोड़ जाना जो उन्हें कभी बिखरने न दे।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 410 min read


कैसे करूँ मैं कन्यादान
आज विदाई की बेला में,
समझ नहीं आता मुझको,
कैसे निकाल दूँ शरीर से,
अपने ही दिल को?
चाहती हूँ भूलना अतीत,
पर भुला नहीं पाती हूँ,
अनजाने ही अतीत की यादों में खो जाती हूँ।।
घर बाहर का टेंशन गुस्सा,
तुम पर ही तो उतारती थी,
पर मुस्कुराती थी तभी मैं
डॉ० शन्नो तिवारी
Sep 262 min read


मुस्कान के उस पार
पटना के पुराने मोहल्लों की अपनी एक अलग दुनिया है। वहाँ घर केवल ईंट और पत्थरों से नहीं बने होते, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ी स्मृतियों, रिश्तों और अनकही कहानियों से भी बने होते हैं। संकरी गलियाँ, एक-दूसरे से सटी दीवारें और कुछ ही फुट की दूरी पर बनी छतें—जहाँ पड़ोसियों की बातचीत के साथ कभी-कभी दिलों की धड़कनें भी एक-दूसरे तक पहुँच जाती हैं।
दीपा शर्मा
Sep 1912 min read


प्रतीक्षा
उसकी मित्रता मेरे लिए अनोखी थी, मेरी आवश्यकता बन गई थी। आज तीन वर्ष के क़रीब हो गए… आज भी जब कभी फोन बजता है तो मैं "हाय प्रीति, क्या कर रही हो?" सुनने के लिए दौड़ पड़ती हूं। क्या फिर कभी वह फोन करेगा? पता नहीं वह ज़िंदा भी है या… पता नहीं, मन में ये अपशकुन क्यों आता है? मैं इंतज़ार करूंगी। कभी तो उसे मेरी याद आएगी… शायद यह कहानी पढ़कर, यदि किसी तरह यह उस तक पहुंच जाए, वह जान सकेगा कि मैं उसके फोन का कितनी बेसब्री से इंतज़ार कर रही हूं।
संगीता शर्मा
Sep 1510 min read


प्यार का दर्द
लेकिन कुछ ही पलों में मुझे एहसास हुआ कि नहीं। मैं स्वार्थी नहीं हूं, ये सब भूलना होगा। मैंने प्रीति की इतनी मदद की थी कि वह सब कुछ भूलकर फिर से वही चंचल प्रीति बन गई और मेरी मेहनत रंग लाई, प्रीति के चेहरे पर मुस्कान धीरे-धीरे वापस आ गई।
पवन कुमार
Jul 45 min read


एक पुरुष ऐसा भी
विवान पढ़ाई में अत्यंत मेधावी थे। मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाले विवान का व्यक्तित्व जितना आकर्षक था, उतना ही सादगीपूर्ण भी। लंबा कद, मजबूत शरीर, चेहरे पर गम्भीरता और आँखों में एक अलग ही आत्मविश्वास—कॉलेज की न जाने कितनी लड़कियाँ उन पर मोहित थीं, पर विवान ने कभी किसी की ओर विशेष ध्यान नहीं दिया। वह अपने लक्ष्य और अपने सिद्धांतों में ही खोए रहते थे।
दीपक सिंह
May 77 min read


अजब प्रेम की गजब कहानी
इसके बाद वह लड़की बीमार होने के बावजूद सुमित से काफी देर तक लिपटी रही और फिर सो गयी। उसे ढंग से लिटाकर सुमित भी वहीं पास में ही एक खाली बेड पर सो गया।
वह सुबह बड़ी ही मनहूस थी। सुमित तो उठ गया पर वह नहीं उठी। सदा के लिए सो गयी। सुमित ने उसे जगाने की बहुत कोशिश की थी पर उसने आँखे नहीं खोली। खोलती भी तो कैसे? वह इस संसार को, सुमित को छोड़कर इस दुनिया से जा चुकी थी। सुमित को रोता बिलखता छोड़कर।
शिवनाथ
Apr 179 min read


अंतिम बार
वो ऊँट के मुँह में जीरा का फोरन जैसा साबित हो रहा है। तुम जल्दी कुछ करो। नहीं तो मैं बच्चों को लेकर अपने मायके चली जाऊँगी।" और यही सोचकर अवधेश ने ये फैसला किया था, कि अब और इंतजार करना मूर्खता के सिवाय कुछ नहीं है। हो सकता है सालों कोरोना खत्म ना हो।तब तो सालों उसका इंस्टीटयूट बंद रहेगा। रमा ठीक कहती है। मुझे अपना इंस्टीटयूट बंद करके कोई और काम करना चाहिए।नहीं तो घर कैसे चलेगा? और यही सोचकर उसने एक जरूरत मंद संस्था को बहुत कम कीमत पर अपना फर्नीचर बेचने का फैसला किया था।
महेश कुमार केशरी
Apr 165 min read


अर्धांगिनी
आत्मविश्वास भरे लहजे में उसने पति की तस्वीर से कहा, "प्रिय, आपसे वादा करती हूँ कि इस तरह रो कर मैं अपना जीवन बर्बाद नहीं करूँगी। आपकी तरह मैं भी देश के लिए शहीद हो जाना चाहती हूँ। आखिर, आपकी अर्धांगिनी जो हूँ।"
वह तैयार होकर सेना में भर्ती के लिए आवेदन करने निकलने लगी। जाते समय उसने अपना चेहरा आईने में फिर से देखा।
इसबार आईना मुस्कुरा कर उसे 'जय जवान' कह रहा था।
संगीता द्विवेदी
Apr 132 min read


एक रात का प्यार
रिया और अर्जुन एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे—बिना किसी वादे के, बिना किसी बंधन के—फिर भी एक अटूट एहसास के साथ।
और इस तरह “एक रात का प्यार” केवल एक कहानी नहीं रहा, बल्कि दो आत्माओं का वह अनमोल मिलन बन गया, जो इस बात का प्रमाण है कि सच्चा प्रेम समय, परिस्थिति और सीमाओं से परे होता है—और अक्सर वहीं खिलता है, जहाँ हम उसे सबसे कम उम्मीद करते हैं।
दीपक कुमार
Apr 64 min read


गलियों में इंसानियत
निर्मल ने महसूस किया कि जीवन का असली सुख वही है, जहां इंसान अपने दिल की सुनता है, सही निर्णय करता है और दूसरों के लिए ईमानदारी और स्नेह रखता है। धीरे-धीरे उनके घर में खुशियों की गूंज बढ़ती गई। राधिका ने अपने बच्चों और निर्मल के साथ हर पल का आनंद लिया। निर्मल ने उनके साथ जीवन बिताने के हर क्षण को संजोया।
राम कुमार वर्मा
Feb 274 min read


बेशकीमती दौलत
यदि आपका जीवनसाथी आज आपके पास है, तो उसका सम्मान कीजिए, उसकी भावनाओं को समझिए, और इस अनमोल रिश्ते को सहेजकर रखिए। क्योंकि सच्चा प्रेम वही है, जो समय की हर आँधी में अडिग खड़ा रहे - और अंत में यही सिद्ध करे कि दुनिया की सबसे बेशकीमती दौलत, प्यार है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 253 min read


नंदिता और मयंक: एक अनकही प्रेम कहानी
“नंदिता! प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरे कि नहीं? फॉर्म पास है या ले आऊँ?"
“ग्रेजुएशन के बाद से ही किसी बड़े व्यवसाई घराने में ब्याह हो जाए, बस इतना ही ख्वाब है मेरे माता पिता का। मैं किसी को पसंद न आई, तभी पढ़ाई पूरी हो पाई”, उदास मुस्कान आकर ठहर गई।
“ऐसा न कहिए, नंदिता! आप कॉलेज की शान हैं, एक खूबसूरत, व्यवहारिक, टॉपर लड़की का सपना सिर्फ किसी सेठ जी की बहू बनना कैसे हो सकता है?” नाटकीय अंदाज़ में उसने पूछा।
नीना सिन्हा
Jan 83 min read


इंतज़ार की बरसात
छोटे से शहर के कॉलेज में जब अदिति ने कदम रखा, तो उसकी आँखों में बड़े-बड़े सपने थे। उसकी सादगी और मासूमियत ने कॉलेज में आते ही सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं दूसरी ओर, राघव कॉलेज का सबसे लोकप्रिय लड़का था - स्मार्ट, हैंडसम, और दिल का बहुत अच्छा। लेकिन राघव को प्यार पर विश्वास नहीं था। उसके लिए बस दोस्ती और मस्ती ही थी।
लक्ष्मी सारस्वत
Dec 26, 20252 min read


सच्चा सुख
राजकुमार विजय और सविता की शादी को पचास साल पूरे हो चुके थे। दोनों की उम्र अब पचहत्तर से ऊपर थी, और इन सालों में उन्होंने हंसी-खुशी और प्यार भरी जिंदगी साथ बिताई थी। समय के साथ, उनके बीच का रिश्ता गहराता गया था, मानो दोनों सच में "दो जिस्म, एक जान" बन गए हों। सविता ने विजय के साथ हर सुख-दुख बांटा था। उनके बीच में शायद ही कोई राज हो, लेकिन एक राज ऐसा था, जो सविता ने कभी विजय को नहीं बताया था। उनकी अलमारी के सबसे ऊपरी हिस्से में एक पुराना जूतों का बॉक्स रखा था। सविता ने विजय क
राजकुमार
Dec 26, 20252 min read


चमत्कारी गुलाब
कभी कभी कुछ बाते इंसान की समझ से बहुत दूर होती है। ऐसी ही बिलकुल समझ से बाहर थी रानी चित्रा। रानी चित्रा किसी चमत्कार से कम नहीं थी। कारण था रानी की सुंदरता। कहते थे रानी ने उम्र को बंदी बना लिया है।
सपना चौधरी
Dec 25, 20254 min read


निस्वार्थ प्रेम
रवि की बहन की शादी को सात साल हो चुके थे। उसने कभी बहन के ससुराल जाने की जरूरत महसूस नहीं की थी, हालांकि उसके माता-पिता त्योहारों पर कभी-कभी वहां जाया करते थे।
हेमा सिंह
Dec 25, 20252 min read


मां या पत्नी
शादी की उम्र हो रही थी और मेरे लिए लड़कियां देखी जा रही थीं। मैं मन ही मन काफी खुश था कि चलो कोई तो ऐसा होगा जिसे मैं अपना हमसफर बोलूंगा, जिसके साथ जब मन करे प्यार करूंगा। मेरी अच्छी खासी नौकरी थी, घर में बूढ़ी मां और पापा थे, और इतनी कमाई थी कि अपने पत्नी का खर्चा उठा सकूं। ये सारी बातें सोच-सोचकर खुश होता था। मां की उम्र भी हो गई थी, तो एक प्वाइंट ये भी लोगों को बताता कि मुझे शादी की कोई जल्दी नहीं, ये तो मां हैं जिनकी उम्र निकल रही है, उनके लिए शादी करनी है।
केशव कालरा
Dec 11, 20256 min read
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