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गलियों में इंसानियत
निर्मल ने महसूस किया कि जीवन का असली सुख वही है, जहां इंसान अपने दिल की सुनता है, सही निर्णय करता है और दूसरों के लिए ईमानदारी और स्नेह रखता है। धीरे-धीरे उनके घर में खुशियों की गूंज बढ़ती गई। राधिका ने अपने बच्चों और निर्मल के साथ हर पल का आनंद लिया। निर्मल ने उनके साथ जीवन बिताने के हर क्षण को संजोया।
राम कुमार वर्मा
Feb 274 min read


बेशकीमती दौलत
यदि आपका जीवनसाथी आज आपके पास है, तो उसका सम्मान कीजिए, उसकी भावनाओं को समझिए, और इस अनमोल रिश्ते को सहेजकर रखिए। क्योंकि सच्चा प्रेम वही है, जो समय की हर आँधी में अडिग खड़ा रहे - और अंत में यही सिद्ध करे कि दुनिया की सबसे बेशकीमती दौलत, प्यार है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 253 min read


नंदिता और मयंक: एक अनकही प्रेम कहानी
“नंदिता! प्रतियोगी परीक्षाओं के फॉर्म भरे कि नहीं? फॉर्म पास है या ले आऊँ?"
“ग्रेजुएशन के बाद से ही किसी बड़े व्यवसाई घराने में ब्याह हो जाए, बस इतना ही ख्वाब है मेरे माता पिता का। मैं किसी को पसंद न आई, तभी पढ़ाई पूरी हो पाई”, उदास मुस्कान आकर ठहर गई।
“ऐसा न कहिए, नंदिता! आप कॉलेज की शान हैं, एक खूबसूरत, व्यवहारिक, टॉपर लड़की का सपना सिर्फ किसी सेठ जी की बहू बनना कैसे हो सकता है?” नाटकीय अंदाज़ में उसने पूछा।
नीना सिन्हा
Jan 83 min read


इंतज़ार की बरसात
छोटे से शहर के कॉलेज में जब अदिति ने कदम रखा, तो उसकी आँखों में बड़े-बड़े सपने थे। उसकी सादगी और मासूमियत ने कॉलेज में आते ही सबका ध्यान अपनी ओर खींचा। वहीं दूसरी ओर, राघव कॉलेज का सबसे लोकप्रिय लड़का था - स्मार्ट, हैंडसम, और दिल का बहुत अच्छा। लेकिन राघव को प्यार पर विश्वास नहीं था। उसके लिए बस दोस्ती और मस्ती ही थी।
लक्ष्मी सारस्वत
Dec 26, 20252 min read


सच्चा सुख
राजकुमार विजय और सविता की शादी को पचास साल पूरे हो चुके थे। दोनों की उम्र अब पचहत्तर से ऊपर थी, और इन सालों में उन्होंने हंसी-खुशी और प्यार भरी जिंदगी साथ बिताई थी। समय के साथ, उनके बीच का रिश्ता गहराता गया था, मानो दोनों सच में "दो जिस्म, एक जान" बन गए हों। सविता ने विजय के साथ हर सुख-दुख बांटा था। उनके बीच में शायद ही कोई राज हो, लेकिन एक राज ऐसा था, जो सविता ने कभी विजय को नहीं बताया था। उनकी अलमारी के सबसे ऊपरी हिस्से में एक पुराना जूतों का बॉक्स रखा था। सविता ने विजय क
राजकुमार
Dec 26, 20252 min read


चमत्कारी गुलाब
कभी कभी कुछ बाते इंसान की समझ से बहुत दूर होती है। ऐसी ही बिलकुल समझ से बाहर थी रानी चित्रा। रानी चित्रा किसी चमत्कार से कम नहीं थी। कारण था रानी की सुंदरता। कहते थे रानी ने उम्र को बंदी बना लिया है।
सपना चौधरी
Dec 25, 20254 min read


निस्वार्थ प्रेम
रवि की बहन की शादी को सात साल हो चुके थे। उसने कभी बहन के ससुराल जाने की जरूरत महसूस नहीं की थी, हालांकि उसके माता-पिता त्योहारों पर कभी-कभी वहां जाया करते थे।
हेमा सिंह
Dec 25, 20252 min read


मां या पत्नी
शादी की उम्र हो रही थी और मेरे लिए लड़कियां देखी जा रही थीं। मैं मन ही मन काफी खुश था कि चलो कोई तो ऐसा होगा जिसे मैं अपना हमसफर बोलूंगा, जिसके साथ जब मन करे प्यार करूंगा। मेरी अच्छी खासी नौकरी थी, घर में बूढ़ी मां और पापा थे, और इतनी कमाई थी कि अपने पत्नी का खर्चा उठा सकूं। ये सारी बातें सोच-सोचकर खुश होता था। मां की उम्र भी हो गई थी, तो एक प्वाइंट ये भी लोगों को बताता कि मुझे शादी की कोई जल्दी नहीं, ये तो मां हैं जिनकी उम्र निकल रही है, उनके लिए शादी करनी है।
केशव कालरा
Dec 11, 20256 min read


प्रेम या आकर्षण
प्रांजुल अवस्थी मेहंदी का कार्यक्रम चल रहा था। शिखा के दोनो हाथों में उसके साजन का नाम लिखने के साथ - साथ सभी सखियां उसे, उसके होने वाले पति का नाम ले लेकर उसे छेड़ रही थीं। घर में सब रिश्तेदार रस्म रिवाजों में व्यस्त थे। तभी शिखा की मम्मी उसके पास आई और उसके सर पर प्यार से हाथ रखा। आंखों में आंसू और चेहरे पर मुस्कान लेकर पूछा,"तू खुश तो है न बेटा.." "हां मम्मा...." बस इतना ही बोल पाई शिखा बेटी के माथे को चूमकर शिखा की मां भी अपने कामों में लग गई। शिखा अपने मम्मी-पापा की इ
प्रांजुल अवस्थी
Dec 9, 20258 min read


मालकिन मैं या तुम
गीता तिवारी शादी की उम्र हो रही थी और मेरे लिए लड़कियां देखी जा रही थीं। मैं मन ही मन काफी खुश था कि चलो कोई तो ऐसा होगा जिसे मैं अपना हमसफर बोलूंगा, जिसके साथ जब मन करे प्यार करूंगा। मेरी अच्छी खासी नौकरी थी, घर में बूढ़ी मां और पापा थे, और इतनी कमाई थी कि अपने पत्नी का खर्चा उठा सकूं। ये सारी बातें सोच-सोचकर खुश होता था। मां की उम्र भी हो गई थी, तो एक प्वाइंट ये भी लोगों को बताता कि मुझे शादी की कोई जल्दी नहीं, ये तो मां हैं जिनकी उम्र निकल रही है, उनके लिए शादी करनी है। ल
गीता तिवारी
Dec 6, 20256 min read


विश्वास की मूर्ति
शिव शंकर सुजीत मार्केट में चलते चलते अचानक से दौड़ने लगता है और दौड़ते हुए जाकर एक महिला के आगे रूक जाता है। और दौड़ने की वजह से हाफ रहा होता है। महिला - बड़े आश्चर्य से देखते हुए बोली, अरे सुजीत तुम, मुझे तो यकीन ही नही हो रहा है कि, इतने दिनों बाद आज हम दोनों फिर से मिले हैं। सुजीत ने हांफते हुए कहा कि, मैं बड़ी देर से तुम्हें देख रहा था लेकिन ठीक से पहचान नहीं पा रहा था इसलिए बोल नहीं पाया लेकिन जब देखा कि तुम अब चली जाओगी तो मुझे दौड़ना पड़ा, तुम्हारा परिचय पूछने के लिए
शिव शंकर
Dec 5, 20254 min read


पश्चाताप
रमाशंकर मिश्रा सुमन की शादी को अभी कुछ ही साल हुए थे। वो अपने पति राजेश और सास के साथ रहती थी। शुरू में सब कुछ ठीक था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, सुमन के और उसकी सास के बीच छोटे-छोटे मामलों को लेकर मतभेद होने लगे। एक दिन सुमन को पता चला कि उसका सोने का हार नहीं मिल रहा है। उसने सारा घर छान मारा, हर जगह ढूंढ़ा, लेकिन हार का कहीं नामोनिशान नहीं था। सुमन को अपने मन में शक हुआ कि कहीं उसकी सास ने ही तो हार नहीं चुराया। उसे याद आया कि उसकी सास ने एक बार उसके गहनों को बड़े ध्
रमाकांत मिश्रा
Nov 24, 20253 min read


सौदा
अंजलि शर्मा इस बड़े शहर में एक छोटा सा कॉस्मेटिक शॉप है मेरा। पति ने खोला था मेरे नाम पर। झुमकी श्रृंगार स्टोर। आज एक नया जोड़ा आया है मेरे दुकान पर। स्टाफ ने बताया कि सुबह से दूसरी बार आये हैं। एक कंगन इन्हें पसंद है पर इनके हिसाब से दाम ज्यादा है। इन्हें देख इस दुकान की नींव, मेरा वजूद, और अपनी कहानी याद आ गई। ऐसे ही शादी के बाद पहली बार हम एक मेले में साथ गए थे। मुझे काँच की चूड़ियों का एक सेट पसंद आया था। तब आठ रुपये की थी और हम ले ना पाए थे। ये बार बार पाँच रुपये की बात कर
अंजलि शर्मा
Nov 19, 20252 min read


चरित्रहीन
ममता पाण्डेय ये वक्त है आने का? मनोहर से रहा न गया। क्या करूं। काम ही ऐसा है? घर में घुसते हुए रागिनी ने जवाब दिया। रात ग्यारह बजने को...
ममता पाण्डेय
Sep 18, 20258 min read


समर्पण
स्नेह लता अग्रवाल ये कहानी है सुरभि की, जो भोपाल की रहने वाली थी। सुरभि की शादी के बाद वो अपने ससुराल ग्वालियर पहुंची। शादी की रौनक खत्म...
स्नेह लता अग्रवाल
Sep 6, 20253 min read


ऐसी होती हैं बेटियां
जमुना प्रसाद मिश्र लड़कियों के एक विद्यालय में आई नई अध्यापिका बहुत खूबसूरत थी, बस उम्र थोड़ी अधिक हो रही थी लेकिन उसने अभी तक शादी नहीं की थी। सभी छात्राएं उसे देखकर तरह-तरह के अनुमान लगाया करती थीं। एक दिन किसी कार्यक्रम के दौरान जब छात्राएं उसके इर्द-गिर्द खड़ी थीं तो एक छात्रा ने बातों बातों में ही उससे पूछ लिया कि मैडम आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की...? अध्यापिका ने कहा- "पहले एक कहानी सुनाती हूं। एक महिला को बेटे होने की लालच में लगातार पांच बेटियां ही पैदा होती रहीं
जमुना प्रसाद मिश्र
Aug 2, 20252 min read


उम्मीद
अरविंद नौखवाल एक पुत्र अपने वृद्ध पिता को रात्रिभोज के लिये एक अच्छे रेस्टोरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन...
अरविंद नौखवाल
Jul 29, 20252 min read


क़र्ज़
शिव शंकर मेहता अखबार में अपने दोस्त की तस्वीर देखकर मुकुंद की आंखों में नमी आ गई। आज उसके दोस्त का कितना नाम है। सारा देश डॉक्टर प्रताप...
Rachnakunj .
Jun 8, 20254 min read


एक प्यारा सपना
मीणा कुमारी राजेश बाबू की उम्र पचास साल हो चुकी थी, लेकिन उनकी सुबह की आदतें वही थीं। नींद से उठते ही एक करवट लेते और अपनी पत्नी मीता से...
मीणा कुमारी
Jun 6, 20252 min read
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