सच्चा सुख
- Dec 26, 2025
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राजकुमार
विजय और सविता की शादी को पचास साल पूरे हो चुके थे। दोनों की उम्र अब पचहत्तर से ऊपर थी, और इन सालों में उन्होंने हंसी-खुशी और प्यार भरी जिंदगी साथ बिताई थी। समय के साथ, उनके बीच का रिश्ता गहराता गया था, मानो दोनों सच में "दो जिस्म, एक जान" बन गए हों।
सविता ने विजय के साथ हर सुख-दुख बांटा था। उनके बीच में शायद ही कोई राज हो, लेकिन एक राज ऐसा था, जो सविता ने कभी विजय को नहीं बताया था। उनकी अलमारी के सबसे ऊपरी हिस्से में एक पुराना जूतों का बॉक्स रखा था। सविता ने विजय को सख्त हिदायत दे रखी थी कि उस बॉक्स को बिना उनकी इजाजत के कोई हाथ न लगाए। विजय ने भी इस बात का सम्मान किया और कभी उस बॉक्स को खोलने की कोशिश नहीं की।
वक्त बीतता गया और दोनों की जिंदगी में कई उतार-चढ़ाव आए। उम्र के साथ बीमारियां भी दस्तक देने लगीं। सविता की सेहत दिन-ब-दिन गिरने लगी और एक दिन उन्हें महसूस हुआ कि उनका अंत निकट है। उस दिन उन्होंने विजय को पास बुलाया, और कहा, "आज मैं तुम्हें उस बॉक्स का राज बताने जा रही हूं।"
विजय ने चौंकते हुए वह बॉक्स उठाया और सविता के पास ले आए। जैसे ही बॉक्स खोला, विजय की आंखें आश्चर्य से फैल गईं। बॉक्स में दो पुरानी खरोची हुई गुड़िया और ढेर सारे 100 रुपये के नोट थे। विजय को समझ नहीं आया कि इन चीजों का मतलब क्या है। उन्होंने सविता से सवाल किया, "ये गुड़िया और इतने सारे पैसे यहां क्यों रखे हैं?"
सविता ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "जब हमारी शादी होने वाली थी, मेरी दादी ने मुझे एक सलाह दी थी। उन्होंने कहा था कि शादी को मजबूत बनाने के लिए हर छोटी-छोटी बात पर लड़ाई-झगड़ा करने के बजाय दिल से माफ करना सीखना। और अगर कभी मुझसे तुम्हारी किसी बात पर गुस्सा आए, तो वह गुस्सा तुम्हें जताने के बजाय इस गुड़िया को खरोच देना।"
विजय यह सुनकर भावुक हो गए। पचास सालों में सविता को उनसे केवल दो बार ही इतनी शिकायत हुई थी कि उसे उन्होंने एक गुड़िया पर उकेरा। यह जानकर विजय की आंखों में आंसू आ गए, क्योंकि सविता का यह प्रेम और धैर्य उनके लिए अनमोल था।
फिर विजय ने ढेर सारे 100 रुपये के नोटों के बारे में पूछा, जो करीब एक लाख रुपये थे। सविता मुस्कुराई और कहा, "यह पैसे मैंने उन खुशियों और संतोष के पलों के लिए जमा किए हैं, जो मैंने तुम्हारे साथ बिताए हैं। जब-जब मुझे तुमसे सच्चा सुख और संतोष महसूस हुआ, मैंने इस बॉक्स में एक नोट डाल दिया।"
विजय की आंखें भर आईं, और उन्होंने सविता को गले लगा लिया। उन्होंने धीरे से कहा, "तुम्हारे जैसे जीवन साथी का साथ मिलना मेरे पिछले जन्मों के पुण्य होंगे।"
यह सुनकर सविता ने विजय का हाथ थामा और मुस्कुराते हुए अपनी आंखें बंद कर लीं।
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