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कोफ्ता-करी
पर वो सिर्फ इस मकान में ही नहीं दुनिया में भी अकेली ही थी। बचपन में ही माता पिता की मृत्यु के बाद दादी ने पाला। चाचा चाची ने भी अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाई, किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी केवल एक माता पिता के प्रेम के अलावा जो वे अपने बच्चों से करते। मासूम बच्ची कोमल अपने बनाये कोकून में सिमटकर रह गई।
संगीता अग्रवाल
6 days ago5 min read


ईदगाह
बुढ़िया का क्रोध तुरंत स्नेह में बदल बच्चे में कितना त्याग, कितना सद्भाव और कितना विवेक है! दूसरों को खिलौने लेते और मिठाई आकर इसका कितना ललचाया होगा? वहाँ इसे अपनी बुढ़िया दादी याद बनी रही। वहाँ भी इसे अपनी बुढ़िया दादी की याद बनी रही। अमीना का मन गद्गद हो गया।
वह रोने लगी। दामन फैलाकर हामिद को दुआएँ देती जाती थी और आँसू की बड़ी-बड़ी बूँदें गिराती जाती थी।
प्रेमचंद
Aug 219 min read


उम्मीद का चिराग
”सबसे बड़ा सबक यह है कि कभी हिम्मत ना हारो। हालात कितने भी मुश्किल हों, अगर आप अपने रब पर भरोसा रखें और मेहनत जारी रखें, तो कोई ताकत आपके ख्वाब दफन नहीं कर सकती।”
तालियां बजने लगीं। समीना ने दिल ही दिल में दुआ की कि उसकी कहानी दूसरों के लिए उम्मीद का चिराग बने।
राम प्रसाद वर्मा
Jul 275 min read


शतरंज के खिलाड़ी
वाजिद अली शाह का समय था। लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, अमीर-ग़रीब, सभी विलासिता में डूबे हुए थे। कोई नृत्य और गान की मजलिस सजाता था, तो कोई अफ़ीम की पीनक ही में मज़े लेता था। जीवन के प्रत्येक विभाग में आमोद-प्रमोद का प्राधान्य था।
प्रेमचंद
Jul 2613 min read


असली कमाई
बाहर बोर्ड के नीचे लिखा है—”Powered by People, Not Just Profit”। रामू काका आसमान की ओर देखते हैं—”भाग्य नहीं बदला, नियत बदल गई, और सब बदल गया।”
अशोक कुमार
Jul 133 min read


ब्लैकमेल
बंटी नाम का अतीत का, काला पन्ना, आरोही की जिंदगी में से हमेशा-हमेशा के लिये बंद हो गया था। उसकी आँखों में योगेश के साथ, विवाह करके, विवाहित जीवन बिताने के इंद्रधनुषी सपने झिलमिला रहे थे।
राजेश त्रिपाठी
Jun 63 min read


पूस की रात
दोनों फिर खेत के डाँड़ पर आए। देखा, सारा खेत रौंदा पड़ा हुआ है और जबरा मड़ैया के नीचे चित लेटा है, मानो प्राण ही न हों।
दोनों खेत की दशा देख रहे थे। मुन्नी के मुख पर उदासी छायी थी, पर हल्कू प्रसन्न था।
मुन्नी ने चिंतित होकर कहा—अब मजूरी करके मालगुजारी भरनी पड़ेगी।
हल्कू ने प्रसन्न मुख से कहा—रात को ठंड में यहाँ सोना तो न पड़ेगा।
प्रेमचंद
Jun 58 min read


लैला
लैला के स्वर-लालित्य की कल्पना करनी हो, तो उस घंटी की अनवरत ध्वनि की कल्पना कीजिए जो निशा की निस्तब्धता में ऊंटों की गरदनों में बजती हुई सुनायी देती हैं, या उस बांसुरी की ध्वनि की जो मध्यान्ह की आलस्यमयी शांति में किसी वृक्ष की छाया में लेटे हुए चरवाहे के मुख से निकलती है।
प्रेमचंद
Jun 523 min read


हद हो गयी
बहुरानी का पार्सल? देखें तो हमारी बहु को हमसे कितना प्यार है? हे राम जे क्या? नींद की गोलियाँ वो भी पूरे हज़ार का बंडल? बबलू एक बात सुनो। तुम लोग रात भर इतनी खटर पट्टर मचाये रखते हो हमे सारी रात उठ उठ कर टोकना पड़ता है, सोते क्यूँ नही? बहु को भेज यहाँ ये सारी उसी को दे दूंगी। आ तो गए चिक्की डब्बू, अब तो चैन सोने दो मुझे, हद हो गई।
निरंजन धुलेकर
May 82 min read


बदरंग जिंदगी
उसके बगल वाला कमरा उसकी बेटी प्रीती का है। पापा के आने की आहट पाकर उसने जल्दी से अपने कमरे की बत्ती बंद कर ली। लेकिन, दामोदर के दिमाग में एक नई दुश्चिंता ने घर करना शुरू कर दिया। आखिर इस साल प्रीति का पच्चीसवाँ लगने वाला है। आखिर कबतक जवान लड़की को कोई घर में रखेगा। कल को कहीं कुछ ऊँच-नीच हो गई तो! तमाम दुश्चिंताओं के बीच दामोदर रात भर करवटें बदलता रहा। लेकिन, उसे नींद नहीं आई।
महेश कुमार केशरी
Apr 168 min read


हर घर की कहानी....
दोस्तों ये किसी एक घर की कहानी नहीं बल्कि हर घर की यही कहानी है, हमारे देश के समाज में शादी होते ही लड़कियों की प्राथमिकताएं बदल दी जाती हैं। अपना परिवार अपना घर ही पराया हो जाता है और उसे वहाँ जाने के लिए उसे दूसरों की आज्ञा लेनी पड़ती है। अगर हो सके तो इस लेख को पढ़कर आप सब भी इस पर गौर जरूर फरमाइयेगा। और हो सके तो बहु को उसके माता-पिता के घर आने-जाने की आज़ादी जरूर दिजियेगा।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Apr 124 min read


धब्बा
धब्बा वो नहीं जो मेरे चेहरे पर है, धब्बा हैं तो ऐसी विकृत मानसकिता वाले लोग और धब्बो को इनकी सही जगह जेल ले जाने के लिए पुलिस अभी आती ही होगी। अब दहेज जेल में मांगे जुर्म में जेल के धब्बे साफ करना दोनो बाप- बेटा।" कह अपना पिता के गले लग गई थी सुरुचि, व न जाने कितनी सुरुचियों की प्रेरणा स्रोत बन चुकी थी।
अदिति महाजन
Apr 122 min read


शूद्रा
गंगा को कई साल से यह चिन्ता लगी हुई थी कि कहीं गौरा की सगाई हो जाय, लेकिन कहीं बात पक्की न होती थी। अपने पति के मर जाने के बाद गंगा ने कोई दूसरा घर न किया था, न कोई दूसरा धन्धा ही करती थी। इससे लोगों को संदेह हो गया था कि आखिर इसका गुजर कैसे होता है! और लोग तो छाती फाड़-फाड़कर काम करते हैं, फिर भी पेट-भर अन्न मयस्सर नहीं होता। यह स्त्री कोई धंधा नहीं करती, फिर भी मां-बेटी आराम से रहती हैं, किसी के सामने हाथ नहीं फैलातीं। इसमें कुछ-न-कुछ रहस्य अवश्य है। धीरे-धीरे यह संदेह और भ
प्रेमचंद
Apr 722 min read


बड़े भाई साहब
मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े, लेकिन केवल तीन दर्जे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैंने शुरू किया था, लेकिन तालीम जैसे महत्त्व के मामले में वह जल्दबाज़ी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भवन की बुनियाद ख़ूब मज़बूत डालना चाहते थे, जिस पर आलीशान महल बन सके। एक साल का काम दो साल में करते थे। कभी-कभी तीन साल भी लग जाते थे। बुनियाद ही पुख़्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने।
प्रेमचंद
Apr 613 min read


एक चुटकी ईमानदारी
ईमानदारी बड़ी घटनाओं से नहीं, छोटे फैसलों से जन्म लेती है। जब हम दूसरों की मजबूरी का लाभ उठाना छोड़ देते हैं — तभी समाज सच में मजबूत बनता है।
रमाकांत चतुर्वेदी
Apr 32 min read


लोहे का तराजू
तब लोगों ने व्यापारी से पूरा मामला क्या है, बताने को कहा। व्यापारी ने लोगों को पूरा मामला बताया तो, व्यापारी की बात सुनकर बुजुर्गों ने साहूकार को तराजू वापस देने को कहा।
शिक्षा : जैसी करनी वैसी बरनी, जैसा बीज बोओगे, वैसी फसल काटोगे।
ललित कुमार
Mar 302 min read


बस स्टैंड की वह बच्ची…
लोभ में इतना मत लो कि किसी और का हिस्सा भी छीन लो। क्योंकि असली संपत्ति धन नहीं, वो संवेदना है… जो भूख में भी बाँटना जानती है।
ललिता सिंह
Mar 242 min read


धिक्कार
दम के दम में पत्थरों के ढेर लग गये और मंदिर का द्वार चुन दिया गया। पासोनियस भीतर दांत पीसता रह गया।
वीर माता, तुम्हें धन्य है! ऐसी ही माता से देश का मुख उज्ज्वल होता है, जो देश-हित के सामने मातृ-स्नेह की धूल-बराबर परवाह नहीं करतीं! उनके पुत्र देश के लिए होते हैं, देश पुत्र के लिए नहीं होता।
प्रेमचंद
Mar 2410 min read


चोर का दान
गरीब भावुक हो गया, "सेठ जी, आप बहुत अच्छे हैं।"
सेठ ने कहा, "न मैं अच्छा हूँ, न तुम। अच्छा तो वह चोर था, जिसने रुक्मणि की शादी की चिंता कर ली। काश, दुनिया में ऐसे भले चोर और होते!"
यह कहते हुए सेठ ने गरीब को गले से लगा लिया
मंजुला अवस्थी
Mar 73 min read
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