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Join date: Mar 22, 2024
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Mar 29, 2026 ∙ 2 min
दगाबाज़ तीतर
बाज़ार में कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया। मानो हर व्यक्ति अपने भीतर झाँकने लगा हो।
दोस्तों : दुश्मन से बचना आसान है, पर अपनों के भेष में छिपे विश्वासघातियों से नहीं। कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं, भीतर से आता है।
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Feb 21, 2026 ∙ 2 min
कद्दू की तीर्थयात्रा
जब तक हमारे व्यवहार व सोच में परिवर्तन नहीं होता है हमारी तीर्थ यात्रा अधूरी ही मानी जाती है। संस्कारों में आधारभूत परिवर्तन ही तीर्थ यात्रा का वास्तविक प्रतिफल है।
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Nov 25, 2025 ∙ 2 min
एकता की ताकत
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव जंगली भैंसों का एक झुण्ड जंगल में घूम रहा था। तभी एक बछड़े ने पुछा... पिता जी, क्या इस जंगल में ऐसी कोई चीज है जिससे डरने की ज़रुरत है? बस शेरों से सावधान रहना.. भैंसा बोला। हाँ, मैंने भी सुना है कि शेर बड़े खतरनाक होते हैं...। अगर कभी मुझे शेर दिखा तो मैं जितना हो सके उतनी तेजी से दौड़ता हुआ भाग जाऊँगा... बछड़ा बोला। नहीं.. इससे बुरा तो तुम कुछ कर ही नहीं सकते.. भैंसा बोला। बछड़े को ये बात कुछ अजीब लगी..वह बोला। क्यों? वे खतरनाक होते हैं... मुझे मार सकते हैं तो भला......
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डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
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