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मैं न चुप हूँ न गाता हूँ
न मैं चुप हूँ न गाता हूँ
सवेरा है मगर पूरब दिशा में
घिर रहे बादल
रूई से धुंधलके में
मील के पत्थर पड़े घायल
ठिठके पाँव
ओझल गाँव
जड़ता है न गतिमयता
अटल बिहारी वाजपेयी
Oct 171 min read


आरज़ू का सफ़र
तुम्हारी चाहत में मिट भी जाएँ,
तो फिर जनम ले के आएँ हम।
कसम से इतना तुम्हें चाहें हम,
हो कसम झूठी तो मर जायें हम।
नीलिमा त्रिपाठी
Oct 121 min read


मेरी याद
तब याद करना तुम सफ़र में किसी मुझे,
मैं हमसफ़र बनके मिलूँगी तुम्हे!!
जब यूँ ही एक दिन मेरी याद आ जाये!
आँखें मूँद लेना, तुझमें ही हँसूँगी मैं!!
संगीता शर्मा
Oct 101 min read


She Carries Both
She simply continues—
quiet, steady, unseen.
Because carrying both
has become her way of life
Dr. Shanno Tiwari
Oct 82 min read


छोटी बह्र में एक ग़ज़ल !!
अश्के-नदामत से क्या कोई
पाप भी अपने धो सकता है
शाइर को ये सहूलत है वो
शे’र में दर्द पिरो सकता है
उसको ही मिलता है रब जो
“मधुमन” ‘मैं ‘ को खो सकता है
मधु मधुमन
Oct 51 min read


पहेली है जिन्दगी
एक अनसुनी अनसुलझी हुई
पहेली है जिन्दगी
जिसे मनन करके सिरे से
सुलझाना पड़ता है
एक अनदेखा अनकहा सच
सपना है जिन्दगी
जिसे बहुत कोशिशों से
पूरा करना पड़ता है
कुछ खोकर पाना है कुछ
पाकर खोना पड़ता है
श्यामा चंद्राकर मोना
Oct 41 min read


धूम्रपान- एक आह्वान
निराशा को दूर कर
आशा की किरण दिखाता
अरे मूढ़! पीले मेरा धुआं,
हृदयसात् करले मुझे
मेरा अक्स तेरे दिल पर,
पड़े बिना नहीं रह सकता।
तब कहना
हाय! हाय!
साची सेठ
Sep 121 min read


शिक्षक दिवस
इस तरह अम्रतकाल में,
शिक्षक दिवस मनाएं,
राष्ट्र का गौरव बढ़ाएं,
आओ शिक्षक दिवस मनाएं !
अशोक कुमार बाजपेई
Sep 51 min read


नींव का पत्थर
नींव का पत्थर हूँ, दिखाई नहीं देता
इमारत की बुलंदी का मज़ा भरपूर लेता।
गहराई विचारों की, व्यक्तित्व की,
लम्हों की तो कभी अपनत्व की,
कहते सब हैं, समझते कम हैं,
गुजरते तो सब हैं पर कहते कम हैं।
साची सेठ
Aug 211 min read


मैं पुनर्जन्म हूँ शबरी की
हे! राम करो कल्याण मेरा, मैं धूल अयोध्या नगरी की।
मुझको तो ऐसा लगता है, मैं पुनर्जन्म हूँ शबरी की।।
वर्षा श्रीवास्तव
Jun 111 min read


समर्पण
पलक उठते ही अलौकिक चेतना में
दिव्य छवि का भव्य सौरभ दीखता है।
इस अवर्णित दिव्य छवि को ले हृदय में
इस अपावन देह का उद्धार कर लो।
चिर व्यथा के........।।
राहुल द्विवेदी 'स्मित'
Jun 81 min read


जगन्नाथ भगवान
सबके मन में आस लगी है ।
पूरन हों जाय सबके काम
दे दो ऐसा प्रभु वरदान
तुम्हरी महिमा बड़ी महान
जय जय जगन्नाथ भगवान
डा अर्चना सिंह चौहान
May 81 min read


चोरी के गीत
जब कविता में घुस गए, नंगे धंधेबाज।
आदर कम रखने लगा, इसके लिए समाज।।
रॉबिनहुड
Apr 171 min read


औरतें
एक बार खुद को फिर सुलगाना चाहती है
अपनी बासी होती जिंदगी में आग लाने के लिए
उस आग में जलकर दमकने के लिए
फीकी पड़ने लगी जिंदगी के रंग को
सुर्ख करके थोड़ा और जी लेने के लिए
फिर जवान होने लगती हैं औरतें।
अनु चक्रवर्ती
Apr 72 min read


वो नारी
कितना कुछ करती हैं सिर्फ एक रिश्ते के लिए,
बेवकूफ़ होती हैं सच्ची औरतें,
उस एक रिश्ते में स्वयं बँध जाती हैं,
और अपेक्षा की चंद ख्वाहिशों में,
जीते जी स्वयं मर जाती हैं।
डॉ रीमा सिन्हा
Apr 31 min read
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