अरमान
- Jan 4
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जीत कुमारी
मेरी हर बात का वो
मान बहुत रखता है
उसपे ये भी कि मेरा
ध्यान बहुत रखता है
मेरी हर फिक्र को
ले जाएगा अपने माथे
यानी वो ज़िंदगी
आसान बहुत रखता है
उसके अरमान कई,
अब भी अधूरे हैं मगर
देखिए फिर भी वो
अरमान बहुत रखता है
दिल के बाहर,
वो सजा रखता है गुलशन
लेकिन दिल के अंदर,
वो बयाबान बहुत रखता है।
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