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कोफ्ता-करी
पर वो सिर्फ इस मकान में ही नहीं दुनिया में भी अकेली ही थी। बचपन में ही माता पिता की मृत्यु के बाद दादी ने पाला। चाचा चाची ने भी अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाई, किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी केवल एक माता पिता के प्रेम के अलावा जो वे अपने बच्चों से करते। मासूम बच्ची कोमल अपने बनाये कोकून में सिमटकर रह गई।
संगीता अग्रवाल
6 days ago5 min read


एक चुटकी ईमानदारी
ईमानदारी बड़ी घटनाओं से नहीं, छोटे फैसलों से जन्म लेती है। जब हम दूसरों की मजबूरी का लाभ उठाना छोड़ देते हैं - तभी समाज सच में मजबूत बनता है।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
6 days ago2 min read


शिक्षक दिवस
इस तरह अम्रतकाल में,
शिक्षक दिवस मनाएं,
राष्ट्र का गौरव बढ़ाएं,
आओ शिक्षक दिवस मनाएं !
अशोक कुमार बाजपेई
Sep 51 min read


नींव का पत्थर
नींव का पत्थर हूँ, दिखाई नहीं देता
इमारत की बुलंदी का मज़ा भरपूर लेता।
गहराई विचारों की, व्यक्तित्व की,
लम्हों की तो कभी अपनत्व की,
कहते सब हैं, समझते कम हैं,
गुजरते तो सब हैं पर कहते कम हैं।
साची सेठ
Aug 211 min read


ईदगाह
बुढ़िया का क्रोध तुरंत स्नेह में बदल बच्चे में कितना त्याग, कितना सद्भाव और कितना विवेक है! दूसरों को खिलौने लेते और मिठाई आकर इसका कितना ललचाया होगा? वहाँ इसे अपनी बुढ़िया दादी याद बनी रही। वहाँ भी इसे अपनी बुढ़िया दादी की याद बनी रही। अमीना का मन गद्गद हो गया।
वह रोने लगी। दामन फैलाकर हामिद को दुआएँ देती जाती थी और आँसू की बड़ी-बड़ी बूँदें गिराती जाती थी।
प्रेमचंद
Aug 219 min read


चरित्र की दृढ़ता
नरेंद्रनाथ चले गए। वह युवती भी हतबुद्धि होकर उन मित्रों के निकट लौटकर बोली, "एक साधू को लुभाने के लिए भेजकर आप लोगों ने खूब मजाक किया।" यह घटना एक ओर जिस प्रकार नरेंद्रनाथ के चरित्र की दृढ़ता दिखाती है, दूसरी ओर प्रमाणित करती है कि उनका मनोबल कितना दृढ़ था।
मुकेश ‘नादान’
Aug 132 min read


उम्मीद का चिराग
”सबसे बड़ा सबक यह है कि कभी हिम्मत ना हारो। हालात कितने भी मुश्किल हों, अगर आप अपने रब पर भरोसा रखें और मेहनत जारी रखें, तो कोई ताकत आपके ख्वाब दफन नहीं कर सकती।”
तालियां बजने लगीं। समीना ने दिल ही दिल में दुआ की कि उसकी कहानी दूसरों के लिए उम्मीद का चिराग बने।
राम प्रसाद वर्मा
Jul 275 min read


शतरंज के खिलाड़ी
वाजिद अली शाह का समय था। लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, अमीर-ग़रीब, सभी विलासिता में डूबे हुए थे। कोई नृत्य और गान की मजलिस सजाता था, तो कोई अफ़ीम की पीनक ही में मज़े लेता था। जीवन के प्रत्येक विभाग में आमोद-प्रमोद का प्राधान्य था।
प्रेमचंद
Jul 2613 min read


ध्यानपरायणता
उसी समय युवक भक्तों ने बहुत हिसाबी गृहस्थों के श्रीरामकृष्ण के कमरे में प्रवेश पर रोक लगा दी। अतः सुरेंद्र, राम आदि सभी रामकृष्ण के दर्शन से वंचित हो गए। अंत में श्रीरामकृष्ण की मध्यस्थता से इस विवाद का समाधान हुआ।
मुकेश ‘नादान’
Jul 262 min read


असली कमाई
बाहर बोर्ड के नीचे लिखा है—”Powered by People, Not Just Profit”। रामू काका आसमान की ओर देखते हैं—”भाग्य नहीं बदला, नियत बदल गई, और सब बदल गया।”
अशोक कुमार
Jul 133 min read


मुफ़्त के गुब्बारे
सच तो यह है कि मैं केवल इतना चाहता हूँ कि किसी और पिता को अपनी बेटी को इस तरह खोने का असहनीय दुःख न सहना पड़े। अगर इन गुब्बारों के बाज़ार से गायब हो जाने से किसी एक मासूम की भी जान बच जाए, तो मुझे लगेगा कि मेरी बेटी की स्मृति व्यर्थ नहीं गई।"
अजीत कुमार
Jul 134 min read


प्यार का दर्द
लेकिन कुछ ही पलों में मुझे एहसास हुआ कि नहीं। मैं स्वार्थी नहीं हूं, ये सब भूलना होगा। मैंने प्रीति की इतनी मदद की थी कि वह सब कुछ भूलकर फिर से वही चंचल प्रीति बन गई और मेरी मेहनत रंग लाई, प्रीति के चेहरे पर मुस्कान धीरे-धीरे वापस आ गई।
पवन कुमार
Jul 45 min read


घड़ा भर बुद्धि
जैसे ही उन्होंने घड़े में झाँका उन्हें हँसी आ गयी। वे बीरबल की पीठ ठोकते हुए बोले – “मान गए भई! तुमने बुद्धि का क्या शानदार फल पेश किया है, लगता है इसे पाकर लंका के राजा के बुद्धिमान होने में तनिक भी देर नहीं लगेगी।”
अर्जुन सिवाच
Jul 43 min read


मूर्ख साधू और ठग
किसी अजनबी की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर ही उस पर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए।
विष्णु शर्मा
Jun 112 min read


मैं पुनर्जन्म हूँ शबरी की
हे! राम करो कल्याण मेरा, मैं धूल अयोध्या नगरी की।
मुझको तो ऐसा लगता है, मैं पुनर्जन्म हूँ शबरी की।।
वर्षा श्रीवास्तव
Jun 111 min read


सच्चा कुबेर
पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं। जल,अन्न और सुभाषित। मूर्ख लोग ही पत्थर के टुकड़ों हीरे,मोती माणिक्य आदि को रत्न कहते हैं..!!
लोकेश कुमार शर्मा
Jun 82 min read
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