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सम्मान का अर्थ
सच्चा दांपत्य वह है जिसमें पति-पत्नी एक-दूसरे के त्याग को पहचानें, श्रेय बांटें और अधूरे सपनों को पूरा करने में समान रूप से साथ दें। घर का श्रम भले ही वेतन-पर्ची में दर्ज न हो, लेकिन परिवार की प्रत्येक सफलता पर उसकी अमिट छाप होती है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
3 days ago12 min read


चुन लिया आकाश
विवाह का अर्थ यह नहीं कि स्त्री अपने पुराने संबंधों और दायित्वों को पीछे छोड़ दे। सच्चा जीवनसाथी वही है, जो उसके परिवार, सपनों और आत्मसम्मान को भी उतना ही आदर दे जितना अपने परिवार और इच्छाओं को देता है। जीवन में मिली अस्वीकृति हमेशा पराजय नहीं होती। कभी-कभी बंद हुआ एक द्वार हमें उस दिशा में मोड़ देता है, जहां हमारी वास्तविक पहचान और सफलता हमारा इंतजार कर रही होती है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
4 days ago14 min read


मन का मौसम
जीवन भी ऋतुओं की तरह निरंतर बदलता रहता है। कभी सफलता की धूप खिलती है, कभी कठिनाइयों की वर्षा होती है और कभी निराशा की ठंड हमें घेर लेती है। परिस्थितियां सदैव हमारे अनुसार नहीं होतीं, किंतु उनके प्रति अपना दृष्टिकोण चुनना हमारे हाथ में होता है।
स्वस्थ शरीर, प्रसन्न मन और सकारात्मक सोच हो, तो हर ऋतु सुंदर और हर परिस्थिति शिक्षाप्रद बन जाती है। आनंद बाहर के मौसम में नहीं, बल्कि हमारे भीतर के मौसम में बसता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
7 days ago6 min read


दहेज की दीवार
अन्याय के सामने मौन रहना भी पीड़ित की वेदना बढ़ा सकता है। इसलिए सही समय पर सही बात कहने का साहस आवश्यक है। साथ ही, प्रायश्चित का अर्थ किसी दूसरे व्यक्ति पर अपना निर्णय थोपना नहीं; अपनी गलती स्वीकार करना, क्षमा मांगना और सुधार का मार्ग चुनना है। विवाह प्रेम, समानता और स्वतंत्र सहमति का संबंध है—सौदेबाजी का नहीं।
डॉ. शन्नो तिवारी
Oct 1912 min read


मैं न चुप हूँ न गाता हूँ
न मैं चुप हूँ न गाता हूँ
सवेरा है मगर पूरब दिशा में
घिर रहे बादल
रूई से धुंधलके में
मील के पत्थर पड़े घायल
ठिठके पाँव
ओझल गाँव
जड़ता है न गतिमयता
अटल बिहारी वाजपेयी
Oct 171 min read


नादान दोस्त
माँ को हँसी आ गई। मगर केशव को कई दिनों तक अपनी ग़लती पर अफ़सोस होता रहा। अंडों की हिफ़ाज़त करने के जोग में उसने उनका सत्यानाश कर डाला। इसे याद कर वह कभी-कभी रो पड़ता था।
दोनों चिड़ियाँ वहाँ फिर न दिखाई दीं।
प्रेमचंद
Oct 176 min read


आरज़ू का सफ़र
तुम्हारी चाहत में मिट भी जाएँ,
तो फिर जनम ले के आएँ हम।
कसम से इतना तुम्हें चाहें हम,
हो कसम झूठी तो मर जायें हम।
नीलिमा त्रिपाठी
Oct 121 min read


मूर्ति उपासना
दूसरे दिन उन्होंने बाजार से एक शिव की मूर्ति लाकर उसे सीता-राम के आसन पर बैठाया और फिर आँखें मूदकर उस मूर्ति के सामने ध्यानमग्न हो गए।
मुकेश ‘नादान’
Oct 123 min read


मेरी याद
तब याद करना तुम सफ़र में किसी मुझे,
मैं हमसफ़र बनके मिलूँगी तुम्हे!!
जब यूँ ही एक दिन मेरी याद आ जाये!
आँखें मूँद लेना, तुझमें ही हँसूँगी मैं!!
संगीता शर्मा
Oct 101 min read


सोच की उड़ान
यदि आज साधन सीमित हैं तो निराश मत होइए। यदि शुरुआत छोटी है तो उसे कमजोरी मत समझिए। और यदि परिस्थितियाँ आपके अनुकूल नहीं हैं, तब भी अपने सपनों की सीमा परिस्थितियों को तय मत करने दीजिए। आज आपकी थाली छोटी हो सकती है, लेकिन आपकी सोच छोटी नहीं होनी चाहिए।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 108 min read


लोभ का अथाह कुआँ
आवश्यकताओं की पूर्ति जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन अधिक पाने की इच्छा जब विवेक, आत्मसम्मान और मानवीय मूल्यों पर हावी होने लगे, तब वही इच्छा बंधन बन जाती है। संतोष का अर्थ प्रयास छोड़ देना नहीं है। उसका अर्थ है—प्रयास करते हुए भी यह पहचान बनाए रखना कि किस उपलब्धि के लिए हमें क्या मूल्य चुकाना पड़ रहा है। क्योंकि लोभ के कुएँ से बाहर निकलने की पहली सीढ़ी है, यह स्वीकार करना कि हम उसमें उतर रहे हैं।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 89 min read


She Carries Both
She simply continues—
quiet, steady, unseen.
Because carrying both
has become her way of life
Dr. Shanno Tiwari
Oct 82 min read


अंतिम यात्रा से पहले
जीवन की अनिश्चितता हमें याद दिलाती है कि हमारे पास वास्तव में केवल वर्तमान क्षण है। जीवन की सार्थकता केवल उसकी लंबाई में नहीं, बल्कि उसमें समाहित प्रेम, करुणा, कृतज्ञता और सद्कर्मों में भी होती है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 67 min read


छोटी बह्र में एक ग़ज़ल !!
अश्के-नदामत से क्या कोई
पाप भी अपने धो सकता है
शाइर को ये सहूलत है वो
शे’र में दर्द पिरो सकता है
उसको ही मिलता है रब जो
“मधुमन” ‘मैं ‘ को खो सकता है
मधु मधुमन
Oct 51 min read


अकेलेपन के उस पार
शायद सुधा माई जाते-जाते उसे यही सिखा गई थीं। और शायद रघु काका की तैंतालीस वर्षों की प्रतीक्षा भी यही कह रही थी—रिश्तों में प्रेम हो तो उसे कहने में देर मत कीजिए, दूरी हो तो उसे मिटाने में अहंकार मत लाइए, और अकेलापन हो तो उससे भागने के बजाय सबसे पहले अपने भीतर लौटना सीखिए। क्योंकि कभी-कभी जिस साथी को हम पूरी दुनिया में खोजते रहते हैं, उससे हमारी पहली मुलाकात—अपने ही भीतर होनी बाकी होती है।
लावण्या नायडू
Oct 512 min read


जाने से पहले
सच्चा प्रेम केवल साथ रहने का नाम नहीं है। कभी-कभी प्रेम का सबसे बड़ा रूप यह होता है कि मनुष्य अपने न रहने की स्थिति में भी अपनों के लिए सुरक्षित भविष्य की व्यवस्था कर जाए। महेश अपने परिवार के साथ अधिक समय नहीं रह सका, लेकिन जाने से पहले वह इतना कर गया कि उसके बाद भी उसके अपने अकेले न रहें। और शायद प्रेम की सबसे सुंदर परिभाषा भी यही है— स्वयं चले जाना, लेकिन अपनों के लिए पीछे एक ऐसा सहारा छोड़ जाना जो उन्हें कभी बिखरने न दे।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 410 min read


पहेली है जिन्दगी
एक अनसुनी अनसुलझी हुई
पहेली है जिन्दगी
जिसे मनन करके सिरे से
सुलझाना पड़ता है
एक अनदेखा अनकहा सच
सपना है जिन्दगी
जिसे बहुत कोशिशों से
पूरा करना पड़ता है
कुछ खोकर पाना है कुछ
पाकर खोना पड़ता है
श्यामा चंद्राकर मोना
Oct 41 min read


कैसे करूँ मैं कन्यादान
आज विदाई की बेला में,
समझ नहीं आता मुझको,
कैसे निकाल दूँ शरीर से,
अपने ही दिल को?
चाहती हूँ भूलना अतीत,
पर भुला नहीं पाती हूँ,
अनजाने ही अतीत की यादों में खो जाती हूँ।।
घर बाहर का टेंशन गुस्सा,
तुम पर ही तो उतारती थी,
पर मुस्कुराती थी तभी मैं
डॉ० शन्नो तिवारी
Sep 262 min read


दो अदृश्य रत्न
याद रखिए—समय से बड़ा कोई हीरा नहीं, धैर्य से बड़ा कोई मोती नहीं। जिसने दोनों का मूल्य समझ लिया, उसके लिए कोई सपना बहुत बड़ा नहीं।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Sep 267 min read
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