प्यार का दर्द
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पवन कुमार
"अरे यार, मुझे भी नहीं पता कि मैंने क्या इकट्ठा किया है, आज सब जांच लूँगा, क्या काम का है और क्या ख़राब, सारा कबाड़ बाहर फेंक दूँगा!" आज सुबह से ही मैंने अपने कमरे की सफ़ाई शुरू कर दी। मेरे कमरे में बहुत गंदगी थी, मेरी 10वीं से लेकर ग्रेजुएशन तक की सारी किताबें वैसे ही पड़ी थीं। मैं सारी किताबें साफ करता रहा। अचानक मेरी दसवीं कक्षा की एक किताब से कुछ निकलकर जमीन पर गिर गया!
ये क्या है?? ये कहते हुए मैंने उसे उठाया तो वो एक तस्वीर थी, इस तस्वीर में एक खरगोश एक सांप के करीब है, इस तस्वीर के जरिए ये दिखाने की कोशिश की गई थी कि दो अलग-अलग स्वभाव के जानवर हैं। एक प्यारा रिश्ता, लेकिन यह मेरे पास कहाँ से आया?
अचानक मुझे अपना बीता हुआ दिन याद आ गया जब मुझे ये तस्वीर मिली और इतना ही नहीं मुझे इस तस्वीर के पीछे की कहानी भी याद आ गई। क्या ये पल पंख लगा कर उड़ जाता है ना?
जब हमारे हाथ में समय होता है तो हम कितने बेफिक्र होकर समय का मजाक उड़ाते हैं और कभी-कभी तो उसकी कद्र भी नहीं करते, लेकिन जब वही समय बीत जाता है तो वह समय ही हमें उसकी कद्र कराता है।
उस दिन भी कुछ ऐसा ही हुआ था, आज भी रोज जैसा था, बस एक चीज रोज जैसी नहीं थी, प्रीति, मेरी सहेली, वो चंचल, हँसमुख, सबकी मदद करने वाली, सबकी चहेती प्रीति आज। वह हमेशा की तरह उतनी चुलबुली नहीं दिख रही थी! आज यह किसी बहती हुई नदी की तरह नहीं बल्कि एक पुरानी नदी की तरह है।
वो किसी तालाब के रुके हुए पानी की तरह थी, आज से पहले मैंने प्रीति को कभी इस तरह नहीं देखा था।
मैं अपने दिल का दर्द कैसे बयान करूँ, प्रीति को इस हालत में देख कर मुझे कैसी अनुभूति हो रही थी। लेकिन क्या प्रीति के साथ-साथ मेरा भी दुखी होना उचित होगा? नहीं बिलकुल नहीं।
इसलिए मैंने प्रीति को हंसाने और उसका दुख कम करने की कोशिश की, लेकिन मेरी बातों से उसकी आंखों में आंसू आ गए। उसकी आँखों में मोटे मोतियों के समान आँसुओं की बूँदें देखकर मेरा मन ग्लानि से भर गया, अब मैं खुद को अपराधी सा महसूस करने लगा।
पहले सिर्फ प्रीती उदास थी, पर अब रो रही है, क्या बताऊं उसे, उसकी आंखों में आंसू अच्छे नहीं लगते, कैसे समझाऊं उसे, उसकी शांति भी उसे काटने को दिल करती है, क्यों नहीं करती वो समझो उसकी इस हरकत से मुझे कितना दर्द हो रहा है? मैं बार में रह रहा हूँ! लेकिन मैं प्रीति को इस तरह रोता हुआ नहीं छोड़ सकता था! मैंने बात करने का तरीका बदला और कहा, "प्रीति, आज मेरा जन्मदिन है और तुम रो रही हो, आओ मुझे जन्मदिन का उपहार दो।"
प्रीति के चेहरे पर एक अनचाही मुस्कान आ गई, वो मुस्कान उसके सारे दर्द को बयां कर रही थी लेकिन वो दर्द क्या था ये कौन जानता है। मैं आपको हंसाने की एक और कोशिश करने लगा। ये इतना छोटा सा गिफ्ट नहीं है, तुम खुलकर हंसोगे तो मेरा गिफ्ट पूरा हो जाएगा। वह खिलखिला कर हँस पड़ी और अपने बैग से एक तस्वीर निकाल कर मुझे दे दी।
चूंकि प्रीति चंचल स्वभाव की थी इसलिए उसकी बनाई तस्वीरें भी बहुत कुछ कहती थीं और हर तस्वीर में एक राज छिपा होता था, ये बात या तो प्रीति जानती थी या फिर उसके जैसा ही कोई तस्वीरों का शौकीन था। उसने मुझे वह तस्वीर गिफ्ट की और बोली, "पवन, यह तुम्हारे जन्मदिन का उपहार है। क्या तुम्हें पता है इस तस्वीर में जो दिख रहा है वह यह है कि दो अलग-अलग स्वभाव के जानवर एक-दूसरे से प्यार करते हैं, एक खरगोश को एक सांप से प्यार है।" यह आज है।" यह समाज का दर्पण है, हम किसी से भी प्यार कर सकते हैं लेकिन इस प्यार में एक मासूम खरगोश है और दूसरा एक शिकारी सांप है, एक न एक दिन यह सांप दोस्ती और प्यार के रूप में अपने साथी का फायदा उठाता है। और जब तक सांप अपने असली रूप में नहीं आ जाता, तब तक वह मित्र ही प्रतीत होता है! आज के समाज में भी ऐसा ही है, कुछ लोग एक खूबसूरत रिश्ते में एक-दूसरे पर हावी होने की कोशिश करते हैं। जो एक खरगोश और एक सांप की तरह है, उनका अंत खुशियों से नहीं भरा है। उनका अंत दर्द और आंसुओं में डूबा हुआ है (इतना कहकर प्रीति की आंखें भर आईं) ।
मुझे समझ नहीं आ रहा था कि प्रीति को कैसे मनाऊं। उसकी हालत देखकर मेरा मन कर रहा था कि उसके सारे दुख दूर कर दूं, लेकिन ऐसा संभव नहीं है।
प्यार और दोस्ती में हर व्यक्ति अपना स्वभाव छोड़कर अलग स्वभाव के व्यक्ति को चुनता है, क्योंकि वह अलग स्वभाव के व्यक्ति की ओर ज्यादा आकर्षित होता है और ये सारी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
मैंने प्रीति को हंसाने के लिए कई कोशिशें कीं, गाने गाए और चुटकुले सुनाए लेकिन इसका प्रीति पर कोई खास असर नहीं हुआ। धीरे-धीरे प्रीति क्लास की बातों में व्यस्त हो गई, लेकिन शांत रही, फिर मैंने प्रीति की सहेली से प्रीति के उदास होने का कारण पूछा, तो उसने बताया कि प्रीति किसी लड़के से प्यार करती थी, लेकिन वह लड़का गलत निकला, जिसके कारण प्रीति, दुखद! यह सुनकर मेरे हृदय में तीव्र वेदना हुई?
प्रीति किसी से प्यार करती थी और मुझे पता भी नहीं चला, मेरी आँखों में आँसू आ गये, अब मुझे प्रीति का दर्द महसूस होने लगा। मैं प्रीति का अच्छा दोस्त था, फिर भी उसने ये बात छुपाई, क्या ये दर्द इस वजह से था या कुछ और भी था, क्या हमारी बातों से प्रीति से मेरा कोई रिश्ता बन गया था?
अब ऐसा लग रहा था जैसे किसी ने मेरे शांत दिल में कंकड़ फेंक दिया हो, अब मेरे मन में जो बेचैनी थी वह ऐसी थी कि मैं न तो किसी से कुछ कह सकता था और न ही अपने सीने में रख सकता था। यह दर्द मेरे सीने को तेज़ाब की तरह जला रहा था। कभी मेरा मन सोचता कि उस सांप जैसे लड़के ने प्रीति के साथ गलत किया है, तो कभी सोचता कि प्रीति ने मेरे जैसे मासूम खरगोश के साथ गलत किया है।
लेकिन कुछ ही पलों में मुझे एहसास हुआ कि नहीं। मैं स्वार्थी नहीं हूं, ये सब भूलना होगा। मैंने प्रीति की इतनी मदद की थी कि वह सब कुछ भूलकर फिर से वही चंचल प्रीति बन गई और मेरी मेहनत रंग लाई, प्रीति के चेहरे पर मुस्कान धीरे-धीरे वापस आ गई।
हमने यह भी समझा कि अलग-अलग स्वभाव के लोगों के विचार भी अलग-अलग होते हैं।
इस तस्वीर को देखते-देखते मैं अपने अतीत से मिल चुका था, तभी मां की आवाज आई।
"पवन, अरे पवन, कहां थे, चाय बना कर भी नहीं पीया।"
मैं चिल्लाया - "माँ, चाय गरम करो, मैं चाय पीने आ रहा हूँ।"
मैंने वो तस्वीर उसी दसवीं क्लास की किताब में रख दी और चाय पीने चला गया।
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