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प्यार का दर्द
लेकिन कुछ ही पलों में मुझे एहसास हुआ कि नहीं। मैं स्वार्थी नहीं हूं, ये सब भूलना होगा। मैंने प्रीति की इतनी मदद की थी कि वह सब कुछ भूलकर फिर से वही चंचल प्रीति बन गई और मेरी मेहनत रंग लाई, प्रीति के चेहरे पर मुस्कान धीरे-धीरे वापस आ गई।
पवन कुमार
Jul 45 min read
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