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दो अदृश्य रत्न
याद रखिए—समय से बड़ा कोई हीरा नहीं, धैर्य से बड़ा कोई मोती नहीं। जिसने दोनों का मूल्य समझ लिया, उसके लिए कोई सपना बहुत बड़ा नहीं।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
4 days ago7 min read


ज़रीन खान: चकाचौंध से परे एक जीवन
प्रसिद्धि समय के साथ बदल सकती है। पेशे बदल सकते हैं। जीवन की परिस्थितियाँ भी हमेशा एक जैसी नहीं रहतीं। लेकिन किसी व्यक्ति ने दूसरों के जीवन को किस प्रकार छुआ, यह बात उसके जाने के बाद भी स्मृतियों में बनी रह सकती है। ज़रीन खान अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका रचनात्मक कार्य, परिवार के साथ उनका जीवन और उनसे जुड़ी स्मृतियाँ उनके जीवन की कहानी को आगे बढ़ाती रहेंगी। क्योंकि किसी जीवन की पूरी कहानी उसके अंतिम दिन पर समाप्त नहीं होती; उसका एक हिस्सा उन लोगों के हृदय में आगे भी लिखा
सुजाता सिंह
Sep 194 min read


मुस्कान के उस पार
पटना के पुराने मोहल्लों की अपनी एक अलग दुनिया है। वहाँ घर केवल ईंट और पत्थरों से नहीं बने होते, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ी स्मृतियों, रिश्तों और अनकही कहानियों से भी बने होते हैं। संकरी गलियाँ, एक-दूसरे से सटी दीवारें और कुछ ही फुट की दूरी पर बनी छतें—जहाँ पड़ोसियों की बातचीत के साथ कभी-कभी दिलों की धड़कनें भी एक-दूसरे तक पहुँच जाती हैं।
दीपा शर्मा
Sep 1912 min read


श्रद्धा से प्रकट हुए महादेव
भक्ति में दिखावे से अधिक भाव का महत्त्व है और शक्ति की वास्तविक शोभा विनम्रता में है। जिस हृदय में श्रद्धा और समर्पण का प्रकाश होता है, वहाँ साधारण वस्तु भी ईश्वर-स्मरण का माध्यम बन सकती है।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Sep 166 min read


प्रतीक्षा
उसकी मित्रता मेरे लिए अनोखी थी, मेरी आवश्यकता बन गई थी। आज तीन वर्ष के क़रीब हो गए… आज भी जब कभी फोन बजता है तो मैं "हाय प्रीति, क्या कर रही हो?" सुनने के लिए दौड़ पड़ती हूं। क्या फिर कभी वह फोन करेगा? पता नहीं वह ज़िंदा भी है या… पता नहीं, मन में ये अपशकुन क्यों आता है? मैं इंतज़ार करूंगी। कभी तो उसे मेरी याद आएगी… शायद यह कहानी पढ़कर, यदि किसी तरह यह उस तक पहुंच जाए, वह जान सकेगा कि मैं उसके फोन का कितनी बेसब्री से इंतज़ार कर रही हूं।
संगीता शर्मा
Sep 1510 min read


सपनों की उड़ान
इन छोटी बातों को लेकर अब आप किसी को भी मरने पर मजबूर नहीं कर सकते। अब हमारे पंखों को भी उड़ान मिल चुका है। अब न्याय मिलना किसी की बपौती नहीं, न ही कोई यह कह सकता है कि तुम पर सिर्फ मेरा अधिकार है,इसलिये अपनी पद प्रतिष्ठा को ध्यान में रखते हुए केवल गाँव की भलाई सोचिए– कहते हुए आशा ने अपना बैग उठाया और आत्मविश्वास के साथ उड़ान भरने की दिशा में कदम बढ़ा दिया।
वीणा कुमारी
Sep 152 min read


इशारा
आज पिंकी के माता-पिता को गए पन्द्रह दिन हो गए थे और अमित का घर एकदम सुचारू रूप से चल रहा था। उनके बूढ़े माँ-बाप बिल्कुल आराम से घर में रह रहे थे । सुबह शाम गृह सहायिका आ कर घर के कामों में हाथ बंटाती थी और पिंकी सास ससुर व पति का अच्छे से ख्याल रखती, क्योंकि वो अमित का दिया हुआ इशारा समझ गई थी कि यदि उसने फिर कोई गड़बड़ की तो....ठीक नहीं होगा।
शुभम गुप्ता
Sep 124 min read


कोफ्ता-करी
पर वो सिर्फ इस मकान में ही नहीं दुनिया में भी अकेली ही थी। बचपन में ही माता पिता की मृत्यु के बाद दादी ने पाला। चाचा चाची ने भी अपनी जिम्मेदारी अच्छे से निभाई, किसी चीज़ की कमी नहीं होने दी केवल एक माता पिता के प्रेम के अलावा जो वे अपने बच्चों से करते। मासूम बच्ची कोमल अपने बनाये कोकून में सिमटकर रह गई।
संगीता अग्रवाल
Sep 65 min read


एक चुटकी ईमानदारी
ईमानदारी बड़ी घटनाओं से नहीं, छोटे फैसलों से जन्म लेती है। जब हम दूसरों की मजबूरी का लाभ उठाना छोड़ देते हैं - तभी समाज सच में मजबूत बनता है।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Sep 62 min read


ईदगाह
बुढ़िया का क्रोध तुरंत स्नेह में बदल बच्चे में कितना त्याग, कितना सद्भाव और कितना विवेक है! दूसरों को खिलौने लेते और मिठाई आकर इसका कितना ललचाया होगा? वहाँ इसे अपनी बुढ़िया दादी याद बनी रही। वहाँ भी इसे अपनी बुढ़िया दादी की याद बनी रही। अमीना का मन गद्गद हो गया।
वह रोने लगी। दामन फैलाकर हामिद को दुआएँ देती जाती थी और आँसू की बड़ी-बड़ी बूँदें गिराती जाती थी।
प्रेमचंद
Aug 219 min read


उम्मीद का चिराग
”सबसे बड़ा सबक यह है कि कभी हिम्मत ना हारो। हालात कितने भी मुश्किल हों, अगर आप अपने रब पर भरोसा रखें और मेहनत जारी रखें, तो कोई ताकत आपके ख्वाब दफन नहीं कर सकती।”
तालियां बजने लगीं। समीना ने दिल ही दिल में दुआ की कि उसकी कहानी दूसरों के लिए उम्मीद का चिराग बने।
राम प्रसाद वर्मा
Jul 275 min read


शतरंज के खिलाड़ी
वाजिद अली शाह का समय था। लखनऊ विलासिता के रंग में डूबा हुआ था। छोटे-बड़े, अमीर-ग़रीब, सभी विलासिता में डूबे हुए थे। कोई नृत्य और गान की मजलिस सजाता था, तो कोई अफ़ीम की पीनक ही में मज़े लेता था। जीवन के प्रत्येक विभाग में आमोद-प्रमोद का प्राधान्य था।
प्रेमचंद
Jul 2613 min read


असली कमाई
बाहर बोर्ड के नीचे लिखा है—”Powered by People, Not Just Profit”। रामू काका आसमान की ओर देखते हैं—”भाग्य नहीं बदला, नियत बदल गई, और सब बदल गया।”
अशोक कुमार
Jul 133 min read


मुफ़्त के गुब्बारे
सच तो यह है कि मैं केवल इतना चाहता हूँ कि किसी और पिता को अपनी बेटी को इस तरह खोने का असहनीय दुःख न सहना पड़े। अगर इन गुब्बारों के बाज़ार से गायब हो जाने से किसी एक मासूम की भी जान बच जाए, तो मुझे लगेगा कि मेरी बेटी की स्मृति व्यर्थ नहीं गई।"
अजीत कुमार
Jul 134 min read


प्यार का दर्द
लेकिन कुछ ही पलों में मुझे एहसास हुआ कि नहीं। मैं स्वार्थी नहीं हूं, ये सब भूलना होगा। मैंने प्रीति की इतनी मदद की थी कि वह सब कुछ भूलकर फिर से वही चंचल प्रीति बन गई और मेरी मेहनत रंग लाई, प्रीति के चेहरे पर मुस्कान धीरे-धीरे वापस आ गई।
पवन कुमार
Jul 45 min read


घड़ा भर बुद्धि
जैसे ही उन्होंने घड़े में झाँका उन्हें हँसी आ गयी। वे बीरबल की पीठ ठोकते हुए बोले – “मान गए भई! तुमने बुद्धि का क्या शानदार फल पेश किया है, लगता है इसे पाकर लंका के राजा के बुद्धिमान होने में तनिक भी देर नहीं लगेगी।”
अर्जुन सिवाच
Jul 43 min read


मूर्ख साधू और ठग
किसी अजनबी की चिकनी चुपड़ी बातों में आकर ही उस पर विश्वास नहीं कर लेना चाहिए।
विष्णु शर्मा
Jun 112 min read


सच्चा कुबेर
पृथ्वी पर तीन ही रत्न हैं। जल,अन्न और सुभाषित। मूर्ख लोग ही पत्थर के टुकड़ों हीरे,मोती माणिक्य आदि को रत्न कहते हैं..!!
लोकेश कुमार शर्मा
Jun 82 min read


कर्म का सिद्धांत
समय बदलता रहता है। जब भगवान् को लेना होता है तो वह कुछ भी नहीं छोड़ते, और जब देना होता है तो छप्पर फाड़ कर देते हैं। और एक बार भगवान् चाहे माफ कर दे, परंतु कर्म माफ नहीं करते।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Jun 64 min read
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