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हद हो गयी
बहुरानी का पार्सल? देखें तो हमारी बहु को हमसे कितना प्यार है? हे राम जे क्या? नींद की गोलियाँ वो भी पूरे हज़ार का बंडल? बबलू एक बात सुनो। तुम लोग रात भर इतनी खटर पट्टर मचाये रखते हो हमे सारी रात उठ उठ कर टोकना पड़ता है, सोते क्यूँ नही? बहु को भेज यहाँ ये सारी उसी को दे दूंगी। आ तो गए चिक्की डब्बू, अब तो चैन सोने दो मुझे, हद हो गई।
निरंजन धुलेकर
May 82 min read


एक पुरुष ऐसा भी
विवान पढ़ाई में अत्यंत मेधावी थे। मध्यमवर्गीय परिवार से संबंध रखने वाले विवान का व्यक्तित्व जितना आकर्षक था, उतना ही सादगीपूर्ण भी। लंबा कद, मजबूत शरीर, चेहरे पर गम्भीरता और आँखों में एक अलग ही आत्मविश्वास—कॉलेज की न जाने कितनी लड़कियाँ उन पर मोहित थीं, पर विवान ने कभी किसी की ओर विशेष ध्यान नहीं दिया। वह अपने लक्ष्य और अपने सिद्धांतों में ही खोए रहते थे।
दीपक सिंह
May 77 min read


वाणी, चरित्र का प्रतिबिंब है।
मनुष्य जितना ही प्रिय भाषण का उच्चारण एवं श्रवण करेगा, उतना ही शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त करेगा। इसके विपरीत खोटे वचन, खोटे सिक्कों के समान कार्य करते हैं। वह आप जिसको भी देंगे, वह आपको सूद समेत लौटा देगा। अतः मीठी वाणी में ही आनंद और माधुर्य है।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Apr 205 min read


सिरफिरा हाथी
हमें दूसरों कि बात का अनुसरण तो जरुर करना चाहिए मगर विशेष परिस्थिति में अपने विवेक का प्रयोग करने से नहीं चूकना चाहिए। परिस्थितियों के अनुसार निर्णय को परिवर्तित करने में ही बुद्धिमानी है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Apr 203 min read


अजब प्रेम की गजब कहानी
इसके बाद वह लड़की बीमार होने के बावजूद सुमित से काफी देर तक लिपटी रही और फिर सो गयी। उसे ढंग से लिटाकर सुमित भी वहीं पास में ही एक खाली बेड पर सो गया।
वह सुबह बड़ी ही मनहूस थी। सुमित तो उठ गया पर वह नहीं उठी। सदा के लिए सो गयी। सुमित ने उसे जगाने की बहुत कोशिश की थी पर उसने आँखे नहीं खोली। खोलती भी तो कैसे? वह इस संसार को, सुमित को छोड़कर इस दुनिया से जा चुकी थी। सुमित को रोता बिलखता छोड़कर।
शिवनाथ
Apr 179 min read


अंतिम बार
वो ऊँट के मुँह में जीरा का फोरन जैसा साबित हो रहा है। तुम जल्दी कुछ करो। नहीं तो मैं बच्चों को लेकर अपने मायके चली जाऊँगी।" और यही सोचकर अवधेश ने ये फैसला किया था, कि अब और इंतजार करना मूर्खता के सिवाय कुछ नहीं है। हो सकता है सालों कोरोना खत्म ना हो।तब तो सालों उसका इंस्टीटयूट बंद रहेगा। रमा ठीक कहती है। मुझे अपना इंस्टीटयूट बंद करके कोई और काम करना चाहिए।नहीं तो घर कैसे चलेगा? और यही सोचकर उसने एक जरूरत मंद संस्था को बहुत कम कीमत पर अपना फर्नीचर बेचने का फैसला किया था।
महेश कुमार केशरी
Apr 165 min read


बदरंग जिंदगी
उसके बगल वाला कमरा उसकी बेटी प्रीती का है। पापा के आने की आहट पाकर उसने जल्दी से अपने कमरे की बत्ती बंद कर ली। लेकिन, दामोदर के दिमाग में एक नई दुश्चिंता ने घर करना शुरू कर दिया। आखिर इस साल प्रीति का पच्चीसवाँ लगने वाला है। आखिर कबतक जवान लड़की को कोई घर में रखेगा। कल को कहीं कुछ ऊँच-नीच हो गई तो! तमाम दुश्चिंताओं के बीच दामोदर रात भर करवटें बदलता रहा। लेकिन, उसे नींद नहीं आई।
महेश कुमार केशरी
Apr 168 min read


अर्धांगिनी
आत्मविश्वास भरे लहजे में उसने पति की तस्वीर से कहा, "प्रिय, आपसे वादा करती हूँ कि इस तरह रो कर मैं अपना जीवन बर्बाद नहीं करूँगी। आपकी तरह मैं भी देश के लिए शहीद हो जाना चाहती हूँ। आखिर, आपकी अर्धांगिनी जो हूँ।"
वह तैयार होकर सेना में भर्ती के लिए आवेदन करने निकलने लगी। जाते समय उसने अपना चेहरा आईने में फिर से देखा।
इसबार आईना मुस्कुरा कर उसे 'जय जवान' कह रहा था।
संगीता द्विवेदी
Apr 132 min read


हर घर की कहानी....
दोस्तों ये किसी एक घर की कहानी नहीं बल्कि हर घर की यही कहानी है, हमारे देश के समाज में शादी होते ही लड़कियों की प्राथमिकताएं बदल दी जाती हैं। अपना परिवार अपना घर ही पराया हो जाता है और उसे वहाँ जाने के लिए उसे दूसरों की आज्ञा लेनी पड़ती है। अगर हो सके तो इस लेख को पढ़कर आप सब भी इस पर गौर जरूर फरमाइयेगा। और हो सके तो बहु को उसके माता-पिता के घर आने-जाने की आज़ादी जरूर दिजियेगा।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Apr 124 min read


धब्बा
धब्बा वो नहीं जो मेरे चेहरे पर है, धब्बा हैं तो ऐसी विकृत मानसकिता वाले लोग और धब्बो को इनकी सही जगह जेल ले जाने के लिए पुलिस अभी आती ही होगी। अब दहेज जेल में मांगे जुर्म में जेल के धब्बे साफ करना दोनो बाप- बेटा।" कह अपना पिता के गले लग गई थी सुरुचि, व न जाने कितनी सुरुचियों की प्रेरणा स्रोत बन चुकी थी।
अदिति महाजन
Apr 122 min read


संगत का प्रभाव
अपने बच्चों को उच्चशिक्षा के साथ साथ अच्छे संस्कार भी दीजिए ताकि वो जहां भी जाये सबका समान करे और अपने आचरण से खुद के साथ परिवार का नाम भी रोशन करे।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Apr 122 min read


अतिथि सत्कार
वह मेरा नित्य अपमान करता है तो भी मैंने उसे सौ साल तक सहा, किंतु तुम एक दिन भी न सह सके।" भगवान अंतर्धान हो गए और महात्मा जी की भी आँखें खुल गई।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Apr 81 min read


शूद्रा
गंगा को कई साल से यह चिन्ता लगी हुई थी कि कहीं गौरा की सगाई हो जाय, लेकिन कहीं बात पक्की न होती थी। अपने पति के मर जाने के बाद गंगा ने कोई दूसरा घर न किया था, न कोई दूसरा धन्धा ही करती थी। इससे लोगों को संदेह हो गया था कि आखिर इसका गुजर कैसे होता है! और लोग तो छाती फाड़-फाड़कर काम करते हैं, फिर भी पेट-भर अन्न मयस्सर नहीं होता। यह स्त्री कोई धंधा नहीं करती, फिर भी मां-बेटी आराम से रहती हैं, किसी के सामने हाथ नहीं फैलातीं। इसमें कुछ-न-कुछ रहस्य अवश्य है। धीरे-धीरे यह संदेह और भ
प्रेमचंद
Apr 722 min read


बड़े भाई साहब
मेरे भाई साहब मुझसे पाँच साल बड़े, लेकिन केवल तीन दर्जे आगे। उन्होंने भी उसी उम्र में पढ़ना शुरू किया था जब मैंने शुरू किया था, लेकिन तालीम जैसे महत्त्व के मामले में वह जल्दबाज़ी से काम लेना पसंद न करते थे। इस भवन की बुनियाद ख़ूब मज़बूत डालना चाहते थे, जिस पर आलीशान महल बन सके। एक साल का काम दो साल में करते थे। कभी-कभी तीन साल भी लग जाते थे। बुनियाद ही पुख़्ता न हो, तो मकान कैसे पायेदार बने।
प्रेमचंद
Apr 613 min read


एक रात का प्यार
रिया और अर्जुन एक-दूसरे की आँखों में देखते रहे—बिना किसी वादे के, बिना किसी बंधन के—फिर भी एक अटूट एहसास के साथ।
और इस तरह “एक रात का प्यार” केवल एक कहानी नहीं रहा, बल्कि दो आत्माओं का वह अनमोल मिलन बन गया, जो इस बात का प्रमाण है कि सच्चा प्रेम समय, परिस्थिति और सीमाओं से परे होता है—और अक्सर वहीं खिलता है, जहाँ हम उसे सबसे कम उम्मीद करते हैं।
दीपक कुमार
Apr 64 min read


इंसानियत की पहचान
धीरे-धीरे पूरा हॉल खड़ा हो गया। सबने मिलकर उन्हें सैल्यूट किया, “जय हिंद सर!” लेकिन सबसे ज्यादा कांप रहे थे वे दो सिपाही जिन्होंने कल उन्हें अपमानित किया था।
वर्मा साहब ने उनकी ओर देखा, “माफी मांगने से ज्यादा जरूरी है सबक लेना। याद रखो जिस तरह तुमने मुझे धक्का दिया, उसी तरह तुम किसी और मजबूर इंसान को भी दे सकते हो। और तब वर्दी का सम्मान खो जाएगा।”
रामप्रसाद शर्मा
Apr 54 min read


चाट वाला
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव। एक चाट वाला था। जब भी उसके पास चाट खाने जाओ तो ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता था। कई बार उसे कहा कि भाई देर हो जाती है, जल्दी चाट लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नहीं होती। एक दिन अचानक उसके साथ मेरी कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई। तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैंने सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी भी देख ही लेते हैं। मैंने उससे एक सवाल पूछ लिया। मेरा सवाल उस चाट वाले से था कि, आदमी मेहनत से आगे
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Apr 51 min read


एक चुटकी ईमानदारी
ईमानदारी बड़ी घटनाओं से नहीं, छोटे फैसलों से जन्म लेती है। जब हम दूसरों की मजबूरी का लाभ उठाना छोड़ देते हैं — तभी समाज सच में मजबूत बनता है।
रमाकांत चतुर्वेदी
Apr 32 min read


दगाबाज़ तीतर
बाज़ार में कुछ क्षण के लिए सन्नाटा छा गया। मानो हर व्यक्ति अपने भीतर झाँकने लगा हो।
दोस्तों : दुश्मन से बचना आसान है, पर अपनों के भेष में छिपे विश्वासघातियों से नहीं। कभी-कभी सबसे बड़ा खतरा बाहर से नहीं, भीतर से आता है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Mar 302 min read


लोहे का तराजू
तब लोगों ने व्यापारी से पूरा मामला क्या है, बताने को कहा। व्यापारी ने लोगों को पूरा मामला बताया तो, व्यापारी की बात सुनकर बुजुर्गों ने साहूकार को तराजू वापस देने को कहा।
शिक्षा : जैसी करनी वैसी बरनी, जैसा बीज बोओगे, वैसी फसल काटोगे।
ललित कुमार
Mar 302 min read
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