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सपनों के सौदागर

  • 1 day ago
  • 1 min read

साची सेठ

 

यदि सपनों के सौदागर होते

हम होते नील गगन में,

मन की बातें, मन की चाहें

पूरी हो जातीं इक पल में,

हम भी बड़े महल में होते

राजकुमारी होते।

यदि सपनों के सौदागर होते

सपनों में ही रहते,

कुटिया के बर्तन भी फिर तो

सोने की सब होते,

पेड़ों पर रसगुल्ले होते

तोड़ तोड़ कर खाते।

सारी इच्छाएं पूरी होतीं

मन में दुःख न होते,

यदि सपनों के सौदागर होते

पंख हमारे होते

कभी उछल कर पेड़ों पर

और कभी हवा में होते,

सागर में बिन सांस लिए ही

गहरे तल में होते,

बड़े बड़े हिमगिरि भी हमसे

तनिक भी दूर न होते।

यदि सपनों के सौदागर होते

प्यारों के संग होते।

यादें सपनों के सौदागर

यादों में बसता जीवन है

यादों में हम सुख पाते हैं

माता और पिता को भी हम

श्रद्धा सुमन चढ़ाते हैं।

नव संतति को देख देख हम

बचपन अपना याद करें,

और यादों में ही तो अपना

स्वर्णिम अतीत दुहराते हैं।

जीवन आधारित यादों पर

मुर्दा बनते बिन यादों के,

करते याद राम कृष्ण की

जीवन लीला गाते हैं।

कौन अभागा बिन यादों के

जीवन यापन करता है,

जाने कितने महाकाव्य भी

यादों पर बन जाते हैं।

जीवन चक्र बिना यादों के

पूरा नहीं कभी होता है,

यादों की एकांत याद में

मंद मंद मुस्काते हैं।

भूले रहे जमाने भर को

जीवन हमने व्यर्थ किया,

अपनों की यादों में ही तो

रोते और बिलखते हैं।

हर्षित हो जाता है तन मन

सुखद याद जब करते हैं,

जाने कितने रहे अभागे

अब भी यादों में ही रोते हैं।

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