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सपनों के सौदागर
यदि सपनों के सौदागर होते
हम होते नील गगन में,
मन की बातें, मन की चाहें
पूरी हो जातीं इक पल में,
हम भी बड़े महल में होते
राजकुमारी होते।
यदि सपनों के सौदागर होते
सपनों में ही रहते,
कुटिया के बर्तन भी फिर तो
सोने की सब होते,
पेड़ों पर रसगुल्ले होते
तोड़ तोड़ कर खाते।
साची सेठ
Feb 231 min read
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