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Mar 26, 20262 min
संतों के प्रति आदर-भाव
दत्त-परिवार के लोग एक गाड़ी में घूमने बाहर निकले हैं। माँ की गोद में बैठे हुए नरेंद्रनाथ कई विषयों पर कितने ही प्रश्न करते चलते हैं, उनकी उत्सुकता की सीमा नहीं रहती। इसी बीच पिता ने उनसे पूछा, "विले, बड़े होने पर तुम क्या बनोगे, कहो तो?" नरेंद्र को सोचने की जरूरत नहीं थी, झट से उत्तर दिया, "सईस वा कोचवान।"

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Jan 6, 20263 min
स्वप्न
नरेंद्र अकसर कलकत्ता में अपने घर में बैठकर सुदूर दक्षिणेश्वर में श्रीरामकृष्ण के ध्यान में निमग्न श्रीमूर्ति का दर्शन किया करते थे। एक दिन उन्होंने स्वप्न में देखा कि श्रीरामकृष्ण उनके निकट आकर कह रहे हैं, “चल, मैं तुझे ब्रज-गोपी श्रीराधा के समीप ले जाऊँगा।”

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Jan 2, 20253 min
संगीत प्रेमी
मुकेश ‘नादान’ नरेंद्र उन दिनों अपने पिता के घर भोजन करने के लिए केवल दो बार जाया करते थे, और दिन-रात निकट के रामतनु बसु की गली में स्थित...

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मुकेश ‘नादान’मुकेश ‘नादान’

मुकेश ‘नादान’

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