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ब्लैकमेल

  • Jun 6
  • 3 min read

राजेश त्रिपाठी

एक अंजान नम्बर से फोन,आरोही के मोबाइल पर आया,आरोही ने उठाया। दूसरी तरफ से आवाज आयी - "हाय स्वीटी,कैसी हो? मुझे दस हजार रुपये चाहिये, अर्जेंट है।"

"बंटी मैं तुम्हें पैसे कहाँ से लाकर दूँ? पच्चीस हजार रु तो तुम पहिले से ही ले चुके हो। अब तुम्हें देने के लिये मेरे पास एक फूटी कौड़ी भी नहीं है।" आरोही ने रुआंसी आवाज में कहा।

"सोच लो जानेमन, एक तरफ सिर्फ दस हजार रुपये हैं और दूसरी तरफ, मेरे साथ वाली तुम्हारी तस्वीरें। यदि इन्हें मैं तुम्हारे मंगेतर को दिखा दूँ, तो अंजाम क्या होगा?" धूर्तता भरे अंदाज में बंटी बोला।

"अरे नहीं…. ये काम तुम बिल्कुल भी नहीं करना।" भयभीत आरोही बोली।

"तो ठीक है, कल दस हजार रुपये मेरे बैंक एकाउंट में जमा हो जाना चाहिये।" यह कहकर बंटी ने फोन काट दिया। आरोही का शरीर पसीने से नहा उठा। डर के मारे उसका चेहरा पीला पड़ गया।

बंटी की माँग पूरी करने के लिए उसने अपनी पसंदीदा घड़ी, अंगूठी तक बेच डाली थी। बंटी के मोबाइल नंबर को ब्लॉक करने के बाद भी वह अपने दोस्तों के मोबाइल नम्बर्स से उसको फोन करता या फिर व्हॉट्सएप चैट करके उसको धमकाता।

आरोही का दिन का चैन, और रातों की नींद हराम हो गई थी। हर समय वह भयभीत रहती। उस दिन को कोसती आरोही, जब उसने बंटी से दोस्ती की थी।

उसे अपने कॉलेज के दिन याद आ गये। एक तो आरोही बहुत खूबसूरत थी। और अति संपन्न परिवार की थी। कॉलेज के लड़के तो उसके चारों-ओर भंवरे की तरह मंडराते। वह किसी को भी तवज्जो नहीं देती। पर बंटी में न जाने उसे क्या दिखाई दिया कि वह उसे अपना दिल दे बैठी। छ: या सात महीने बाद जब उसे बंटी की चरित्र-हीनता के बारे में पता चला, तो किनारा कर लिया बंटी से आरोही ने।

ग्रेजुएशन खत्म करने के बाद, आरोही की सगाई, शहर के बेहद संपन्न और अति आकर्षक व्यक्तित्व के धनी योगेश से संपन्न हुई। आरोही खुश थी, बेहद खुश।

पर उसकी मंगनी से बंटी बौखला उठा। उसने आरोही को ब्लैक मेल करना शुरु कर दिया। आज फिर उसने दस हजार रुपयों की माँग की है। आरोही क्या करे, कहाँ जाये, उसे कुछ समझ में नहीं आ रहा था। तभी उसे अपनी पुरानी सखी प्रभा की याद आई, जो कि वकील थी। आरोही उससे मिलने गई। फूट-फूटकर रोते हुए उसे अपनी कहानी सुनाई।

प्रभा ने उसे ढाँढस बंधाया और उसे एक तरकीब बताई। एक महीने के बाद फिर बंटी का फोन आया। पैसों की माँग को लेकर।

तब आरोही ने उसे कठोर शब्दों में कहा - "बंटी, ध्यान से मेरी बात सुनो। मैं तुम्हें एक फूटी कौड़ी भी नहीं देने वाली। अब यदि तुम ने मुझे फोन किया, तो मैं तुम्हारे फोन कॉल्स को रिकॉर्ड करुंगी, और तुम्हारे व्हॉट्स एप चैटिंग के 'स्क्रीन-शॉट्स' लेकर पुलिस के पास जाऊंगी। फिर देखना, पुलिस तुम्हारा क्या हश्र करती है?" पुलिस के नाम से बंटी की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई।

"नहीं, नहीं, तुम ऐसा कुछ मत करना। पुलिस में मत जाना।"भयभीत स्वर में बंटी बोला।

"मैं ये काम करुंगी। सौ प्रतिशत नहीं, बल्कि एक सौ एक प्रतिशत" -आरोही का स्वर अभी भी कठोर था।

"आरोही, प्लीज मुझे माफ कर दो। मैं तुम्हारी जिंदगी में अब कोई दखल नहीं दूँगा। मैं तुम से प्रॉमिस करता हूँ। पर तुम पुलिस में शिकायत मत करना।" बंटी ने डर के मारे गिड़गिड़ाते हुए कहा।

आरोही की शादी थी। स्टेज पर खड़ी आरोही अप्सरा जैसी खूबसूरत लग रही थी। उसके बगल में खड़ा योगेश किसी फिल्मी हीरो की तरह लग रहा था। सभी इस जोड़े की तारीफों के पुल बाँध रहे थे। तभी प्रभा स्टेज पर आयी, आते ही आरोही को गले लगाकर,उसके कानों में फुसफुसाकर बोली - "तुम्हारे बंटी मियाँ, तो पुलिस के डर से दुम दबाकर भाग गये। दूल्हे राजा तो बहुत हैंडसम हैं, उन्हें तुम अपने प्यार की मुट्ठी में सदा कैद रखना।"

आरोही ने भी अत्यंत धीमे स्वर में कहा - "ये सब तुम्हारी मदद से ही संभव हुआ है।" और यह कहकर वह मंद-मंद मुस्करा उठी।

बंटी नाम का अतीत का, काला पन्ना, आरोही की जिंदगी में से हमेशा-हमेशा के लिये बंद हो गया था। उसकी आँखों में योगेश के साथ, विवाह करके, विवाहित जीवन बिताने के इंद्रधनुषी सपने झिलमिला रहे थे।

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