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खुद्दार
सरला सिंह बाज़ार में एक आदमी ने फ़ल बेचने वाले एक दुकानदार से पूछा - केले और सेब क्या भाव हैं भाई? केले 40 रु. दर्जन और सेब 120 रु. किलो हैं साहब....दुकानदार ने कहा। आदमी बोला, कुछ ठीक ठाक भाव लगा दो भाई। तभी ठीक उसी समय फटे पुराने कपड़े पहनी हुई एक गरीब सी दिखने वाली औरत दुकान में आयी और बोली, मुझे एक किलो सेब और एक दर्जन केले चाहिये - क्या भाव है भैया? दुकानदार ने कहा, केले 5 रु दर्जन और सेब 25 रु किलो, इससे एक पैसे भी कम नहीं लूँगा। औरत ने कहा, ठीक है, जल्दी से दो दर्जन
सरला सिंह
Aug 12, 20242 min read


मनहूस
रमाकांत मिश्रा एक व्यक्ति के बारे में मशहूर हो गया कि उसका चेहरा बहुत मनहूस है। लोगों ने उसके मनहूस होने की शिकायत राजा से की। राजा ने...
रमाकांत मिश्रा
Aug 11, 20241 min read


कला का अभिमान
अनुज कुमार जायसवाल नारायण दास एक कुशल मूर्तिकार थे। उनकी बनाई मूर्तियां दूर-दूर तक मशहूर थीं। नारायण दास को बस एक ही दुख था, कि उनके कोई...
अनुज कुमार जायसवाल
Aug 11, 20243 min read


रिश्ता नहीं सौदा
सन्दीप गढवाली लडके के पिता ने पंडित जी को एक लडकी देखने को कहा। पण्डित जी बोले हाँ एक लडकी है। अभी कुछ दिनों पहले उसके पिता ने भी एक लडका...
सन्दीप गढवाली
Aug 7, 20242 min read


प्रतिस्पर्धा की राह
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव चार महीने बीत चुके थे, बल्कि 10 दिन ऊपर हो गए थे। किंतु बड़े भइया की ओर से अभी तक कोई ख़बर नहीं आई थी कि वह पापा...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Aug 7, 20248 min read


सफर
नीलिमा मिश्रा ट्रेन चलने को ही थी कि अचानक कोई जाना पहचाना सा चेहरा जर्नल बोगी में आ गया। मैं अकेली सफर पर थी। सब अजनबी चेहरे थे। स्लीपर...
नीलिमा मिश्रा
Aug 6, 20246 min read


शराब की पार्टी
नेकराम सूरज, सुरेश, रमन तीनों दोस्तों ने अलग से समीर को पार्टी करने के लिए कहा था। देख समीर तेरे जन्मदिन पर शराब की बोतले खुलेंगी। जमकर...
नेकराम
Aug 6, 20245 min read


जीवन का एहसास
एक जंगल में कैसोवैरी जाति की एक चिड़िया रहती थी। यह चिड़िया उड़ सकने में असमर्थ थी। कैसोवैरी चिड़िया को बचपन से ही बाकी चिड़ियों के बच्चे...
Rachnakunj .
Aug 2, 20242 min read


सोने का कंगन
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव एक जंगल में एक बूढ़ा बाघ रहता था। बुढ़ापे के कारण उसका शरीर जवाब देने लगा था। उसके दांत और पंजे कमज़ोर हो गए थे।...
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Jul 31, 20242 min read


मायका
रमेश कुमार संतोष करवाचौथ को एक दिन ही बचा है। उस का ध्यान बार-बार भैया और भाभी की तरफ जा रहा है। मन होता है, फ़ोन करूँ। परन्तु करती नहीं...
रमेश कुमार संतोष
Jul 31, 20242 min read


आत्महत्या
राजीव रंजन आज कचहरी में एक अजीब सा मुकद्दमा आया था। जिसका फैसला सुनने के लिए इतने लोग आये थे कि कचहरी खचाखच भरी थी। जितने लोग थे उतनी...
राजीव रंजन
Jul 30, 20243 min read


एक बार तो सोचती
विभा गुप्ता रत्ना के हाथ रखने से पहले ही उसके ननदोई श्रीधर ने अपना हाथ पुस्तक पर से हटा लिया तो वह तिलमिला गई। अपनी इच्छा पर पानी फिरते...
विभा गुप्ता
Jul 30, 20242 min read


बहू की बंदिशे
संगीता शर्मा आशी आज बहुत गुस्से में थी, और होती भी क्यों ना? उसे लगता था, मोहल्ले की सभी बहुओं में सबसे ज्यादा दुखी वही है। शाम को जब...
संगीता शर्मा
Jul 16, 20243 min read


नया मकान
संतोष कुमार पटेल "भैया, परसों नये मकान पर हवन है। छुट्टी (इतवार) का दिन है। आप सभी को आना है, मैं गाड़ी भेज दूँगा।" छोटे भाई लक्ष्मण ने बड़े भाई भरत से मोबाईल पर बात करते हुए कहा। "क्या छोटे, किराये के किसी दूसरे मकान में शिफ्ट हो रहे हो?" "नहीं भैया, ये अपना मकान है, किराये का नहीं।" “अपना मकान”, भरपूर आश्चर्य के साथ भरत के मुँह से निकला। "छोटे तूने बताया भी नहीं कि तूने अपना मकान ले लिया है।" "बस भैया", कहते हुए लक्ष्मण ने फोन काट दिया। "अपना मकान", "बस भैया" ये शब्द भरत क
संतोष कुमार पटेल
Jul 15, 20243 min read


क्या ये ही जिंदगी है?
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव जीवन के 20 साल हवा की तरह उड़ गए। फिर शुरू हुई नौकरी की खोज। ये नहीं वो, दूर नहीं पास। ऐसा करते करते...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jul 15, 20243 min read


आत्मघाती कदम
श्याम आठले मैं ऑफिस के काम से मुंबई गया था। वैसे तो ऑफिस की तरफ से रुकने की व्यवस्था थी पर मित्र आकाश की ज़िद के आगे हार मानकर...
श्याम आठले
Jul 14, 20242 min read


संस्कारी बहू
वीरेन्द्र सिंह एक सेठ के सात बेटे थे। सभी का विवाह हो चुका था। छोटी बहू संस्कारी माता-पिता की बेटी थी। बचपन से ही अभिभावकों से अच्छे...
वीरेन्द्र सिंह
Jul 13, 20245 min read


एक मौका और ...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक बार मैं शहर से अपने गाँव जा रहा था। रास्ते में एक स्टेशन पर ट्रेन रुकी यहाँ उसका 15 मिनट का स्टॉपेज था, इसलिए...
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Jul 13, 20245 min read


आवरण
सुमन द्विवेदी धाड़… धाड़… धाड़… सविता का कलेजा तेज़ी से धड़कने लगा। ऐसा लग रहा था जैसे वह बहुत दूर से दौड़ कर आ रही हो। ठंड के मौसम में भी उसके...
सुमन द्विवेदी
Jul 12, 202414 min read
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