top of page
OUR BLOGS


धिक्कार
दम के दम में पत्थरों के ढेर लग गये और मंदिर का द्वार चुन दिया गया। पासोनियस भीतर दांत पीसता रह गया।
वीर माता, तुम्हें धन्य है! ऐसी ही माता से देश का मुख उज्ज्वल होता है, जो देश-हित के सामने मातृ-स्नेह की धूल-बराबर परवाह नहीं करतीं! उनके पुत्र देश के लिए होते हैं, देश पुत्र के लिए नहीं होता।
प्रेमचंद
Mar 2410 min read


हादसा
संगीता अग्रवाल हैदराबाद की भीड़भाड़ भरी गलियों में एक मासूम बच्चा आर्यन फुटपाथ पर बैठा था। उसकी उम्र मुश्किल से 8 साल थी, लेकिन उसके चेहरे पर बचपन की मासूमियत से ज्यादा भूख और बेबसी की लकीरें साफ नजर आती थीं। फटे कपड़े, नंगे पैर और खाली आंखों में हजारों सपने। आर्यन कभी अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से किराए के कमरे में रहता था। उसके पिता सत्यपाल मजदूरी करते थे और मां सुनीता सिलाई करती थीं। गरीब जरूर थे, लेकिन बेटे के लिए बड़े-बड़े सपने थे। सत्यपाल हमेशा कहते थे - ”आर्यन पढ़
संगीता अग्रवाल
Dec 24, 20253 min read
bottom of page