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इंसानियत की पहचान
धीरे-धीरे पूरा हॉल खड़ा हो गया। सबने मिलकर उन्हें सैल्यूट किया, “जय हिंद सर!” लेकिन सबसे ज्यादा कांप रहे थे वे दो सिपाही जिन्होंने कल उन्हें अपमानित किया था।
वर्मा साहब ने उनकी ओर देखा, “माफी मांगने से ज्यादा जरूरी है सबक लेना। याद रखो जिस तरह तुमने मुझे धक्का दिया, उसी तरह तुम किसी और मजबूर इंसान को भी दे सकते हो। और तब वर्दी का सम्मान खो जाएगा।”
रामप्रसाद शर्मा
7 days ago4 min read
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