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इज्जत और इंसानियत
गोपाल चंद्र सर्दियों की सुबह थी। मुंबई एयरपोर्ट पर भीड़ अपने चरम पर थी। बिजनेस ट्रैवलर्स लैपटॉप लेकर भाग रहे थे, परिवार छुट्टियों पर जाने को तैयार थे और हर तरफ चकाचौंध थी। इसी भीड़ में एक बुजुर्ग महिला, श्रीमती विमला देवी, धीरे-धीरे चलते हुए एयरलाइंस के काउंटर तक पहुंची। उनका पहनावा सादा था - एक सूती साड़ी, ऊपर पुराना शॉल और पैरों में साधारण चप्पलें। हाथ में एक प्लास्टिक कवर में रखी प्रिंटेड टिकट थी। चेहरे पर शांति थी, लेकिन आंखों में थकान भी थी। उन्हें बस सीट कंफर्म होने का
गोपाल चंद्र
Nov 20, 20256 min read
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