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बन्दर और लकड़ी का खूंटा
एक समय शहर से कुछ ही दूरी पर एक मंदिर का निर्माण किया जा रहा था। मंदिर में लकड़ी का काम बहुत था इसलिए लकड़ी चीरने वाले बहुत से मज़दूर काम पर लगे हुए थे। यहां-वहां लकड़ी के लठ्टे पडे हुए थे और लठ्टे व शहतीर चीरने का काम चल रहा था। सारे मज़दूरों को दोपहर का भोजन करने के लिए शहर जाना पड़ता था, इसलिए दोपहर के समय एक घंटे तक वहां कोई नहीं होता था। एक दिन खाने का समय हुआ तो सारे मज़दूर काम छोड़कर चल दिए। एक लठ्टा आधा चिरा रह गया था। आधे चिरे लठ्टे में मज़दूर लकड़ी का कीला फंसाकर चले गए।
पंचतंत्र की कहानी
Jan 32 min read


कफ़न
प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “कफ़न” भारतीय ग्रामीण समाज की कठोर सच्चाइयों, गरीबी, संवेदनहीनता और सामाजिक व्यवस्था की विडंबना को उजागर करती है। कहानी के मुख्य पात्र घीसू और माधव हैं, जो बाप–बेटा हैं और अत्यंत निर्धन तथा कामचोर स्वभाव के हैं। वे समाज के हाशिए पर जीवन जीते हैं और मेहनत से दूर भागते हैं।
यह कहानी गरीबी से उपजे नैतिक पतन, सामाजिक अन्याय और मानवीय मूल्यों के क्षरण पर तीखा व्यंग्य करती है।
पूरी कहानी जानने के लिए पढ़ें : प्रेमचंद की लिखी कहानी कफ़न ?
प्रेमचंद
Jan 210 min read
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