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चुटकी भर झूठ
सविता शर्मा विनय संदीप और चिंटू एक ही स्कूल में पढ़ते थे। संदीप और चिंटू बहुत ही शैतानी करते थे और उन्हें टीचर से कक्षा में डांट भी बहुत...
Rachnakunj .
Nov 5, 20232 min read


रंगविहीन
संगीता बिजलानी पति की मृत्यु के महिने भर बाद शकुन ने सासु माँ और अपने दोनों बच्चों के भविष्य को देखते हुए जैसे-तैसे खुद को संभाला और पुनः...
Rachnakunj .
Nov 5, 20232 min read


मेरी मां
पुष्पा कुमारी "पुष्प" "सुनिए! आजकल माँ जी खाना ठीक से नहीं खाती।" रसोई से निपट कर कमरे में आकर पति के बगल में बैठते हुए रजनी ने यह बात...
Rachnakunj .
Nov 3, 20233 min read


हलवे का कटोरा
डॉ. कृष्ण कांत श्रीवास्तव एक दिन मेरे पिता ने हलवे के 2 कटोरे बनाये और उन्हें मेज़ पर रख दिया। एक के ऊपर 2 बादाम थे, जबकि दूसरे कटोरे में...
Rachnakunj .
Nov 3, 20232 min read


रौनक
मीनाक्षी चौहान कितने दिन हो गये थे फिर भी मम्मी जी बात-बात पर भावुक हो कर रो पड़तीं। नानी सास को गुजरे महीने भर से ज्यादा हो गया था पर...
Rachnakunj .
Nov 2, 20232 min read


भाग्य
डॉ. कृष्ण कांत श्रीवास्तव यात्रियों से भरी बस चली जा रहा थी, जब अचानक मौसम बदला और भारी बारिश चालू हो गयी और बिजली भी चारों तरफ चमकने...
Rachnakunj .
Nov 2, 20232 min read


इंकलाब लिखता हूँ।
अमरेन्द्र मैं जो भी लिखता हूँ, इंकलाब लिखता हूँ। किसी के दुख-दर्द से, जुड़ा सवाल लिखता हूँ। मैं तो बस इतना ही, काम करता हूँ। हर अन्याय के...
Rachnakunj .
Nov 1, 20231 min read


यादगार करवाचौथ
वन्दना पुरोहित सुनीति अपने पति राकेश को खाना खिलाते हुए हमेशा की तरह बड़ी उत्सुकता से पूछती "आज काहे का डेकोरेशन करके आए हो।" राकेश...
Rachnakunj .
Oct 31, 20233 min read


मिशन करवाचौथ
पूनम अग्रवाल मोनिका करवाचौथ से हफ़्ता भर पहले बड़े ज़ोर शोर से त्यौहार की तैयारी में लगी थी। आई लैशेज़ और नेल्स एक्सटेंशन तो उसने पहले ही...
Rachnakunj .
Oct 31, 20234 min read


नेक प्रयास
रूप किशोर श्रीवास्तव बात पुराने समय की है जब राजा, महाराजा और साहूकार होते थे। एक शहर में सेठ गिरधारीमल नाम का साहूकार था। ईश्वर की कृपा...
Rachnakunj .
Oct 30, 20233 min read


बहू का दर्द
डा. मधु आंधीवाल आज सुनीता बहुत खुश थी क्योंकि कल उसके इकलौते बेटे संचित की शादी थी। वह तो भाग-भाग कर सबको बता रही थी कि सबको बहू प्राची...
Rachnakunj .
Oct 30, 20232 min read


वापसी
गुलशन नंदा का उपन्यास (1) “नो इट्स इम्पॉसिबल, मेजर रशीद, तुम्हें ज़रूर कोई ग़लतफ़हमी हुई है.” “सर, मेरे आँखें एक बार धोखा खा सकती हैं,...
Rachnakunj .
Oct 28, 20232 min read


नसीहत
के. कामेश्वरी कालिंदी अपनी बेटी दीपा की शादी एक ऐसे घर में करती है, जहाँ तीन लड़कियों के बीच एक ही लड़का है। वे बहुत ही पैसे वाले थे और...
Rachnakunj .
Oct 27, 20233 min read


एक जादुई घर
शशि गुप्ता एक दिन एक लेखक की पत्नी ने उससे कहा कि तुम बहुत किताबें लिखते हो। आज मेरे लिए कुछ लिखो तो फिर मुझे विश्वास होगा कि तुम सच में...
Rachnakunj .
Oct 27, 20232 min read


बदलाव
पूनम भटनागर सावित्री और रूक्मिणी बैठीं हंसी ठठ्ठा कर रही थीं कि सावित्री एकाएक विषय बदलती हुई बोली, तो रूक्मिणी कब बना रही हो साक्षी को...
Rachnakunj .
Oct 25, 20233 min read


कटोरी पनिहारिन
डॉ. जहान सिंह जहान “कटोरी में जिसने चाहा खाया और उसे झूठा करके छोड़ दिया।” कटोरी, ओ कटोरी, कहां मर गई? बड़ी ठकुराइन चिल्ला-चिल्ला कर थक...
Rachnakunj .
Oct 25, 20235 min read


बूढ़ा बरगद
विभा गुप्ता "बाबूजी, मैं आपके और आपकी बहू की रोजाना चिकचिक से अब तंग आ गया हूँ। कल ही आपको वृद्धाश्रम छोड़ आता हूँ, आपकी बहू को शांति मिल...
Rachnakunj .
Oct 24, 20232 min read


श्राद्ध की चिन्ता
मुकुन्द लाल आकाश में किरण फूटते-फूटते यह खबर गांव में फैल गई कि बूढ़े धनेशर की मृत्यु हो गई। उसके घर से रूदन-क्रंदन की आवाजें आ रही थी।...
Rachnakunj .
Oct 24, 20232 min read


विसर्जन
प्रेम नारायन तिवारी मनोज सिन्हा आफिस जाने के लिए तैयार हो रहे हैं। उनकी पत्नी मधुलिका उनका नास्ता तैयार कर रही हैं। बैठक मे इधर-उधर गणपति...
Rachnakunj .
Oct 22, 20234 min read


जेब खर्च
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव सेठ बद्री प्रसाद जी अपने दोनो बेटों अनिल व सुनील को प्रतिदिन दो रुपये जेब खर्च का देते थे। उस समय साठ सत्तर के...
Rachnakunj .
Oct 22, 20232 min read
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