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कश्ती में छेद
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव एक आदमी ने एक पेंटर को बुलाया अपने घर, और अपनी नाव दिखाकर कहा कि इसको पेंट कर दो। उस पेंटर ने पेंट लेकर उस नाव...
Rachnakunj .
Jan 7, 20242 min read


किस घर की बेटी
अनजान (एक कवि नदी के किनारे खड़ा था। तभी वहाँ से एक लड़की का शव नदी में तैरता हुआ जा रहा था। तो तभी कवि ने उस शव से पूछा ----) कौन हो तुम...
Rachnakunj .
Jan 6, 20241 min read


परमात्मा से मिलन
राजेंद्र कुमार दीक्षित एक संत, एक सेठ के पास आए। सेठ ने उनकी बड़ी सेवा की। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर, संत ने कहा- अगर आप चाहें तो आपको...
Rachnakunj .
Jan 6, 20242 min read


टोकरी
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव एक बार की बात है। एक जंगल में एक संत छोटी सी कुटिया बनाकर रह रहे थे। जहां पर एक नदी भी थी। वे दिनभर भगवान के...
Rachnakunj .
Jan 5, 20242 min read


ताकत
अखिलेश दुबे एक बार एक व्यक्ति दिन भर मजदूरी करके पैसे कमाने के पश्चात अपने घर की तरफ जा रहा था। सर्दियों के दिन थे और शाम ढल चुकी थी।...
Rachnakunj .
Jan 5, 20242 min read


कलमुंही
मोनिका रघुवंशी सुना आपने, आपकी बड़ी बहुरिया क्या गुल खिला रही है आजकल। इस कुलक्षिनी ने तो हमारा नाम डुबोने की कसम ले रखी है..... ललिता...
Rachnakunj .
Jan 4, 20242 min read


मुफ्त की रोटी
लक्ष्मी कुमावत शाम हो चुकी थी। सात वर्षीय विवान अपनी दादी (कमला जी) के साथ हर शाम को मंदिर जाया करता था। वहां से वापस लौटते समय विवान...
Rachnakunj .
Jan 4, 20244 min read


वृद्धाश्रम
विभा गुप्ता "बाबूजी, मैं आपके और आपकी बहू की रोजाना चिकचिक से अब तंग आ गया हूँ। कल ही आपको वृद्धाश्रम छोड़ आता हूँ, आपकी बहू को शांति मिल...
Rachnakunj .
Jan 3, 20242 min read


यादों और सौगातों में नीम
मधु मधुलिका ऐ नीम कैसे करूँ तुम्हारा वर्णन मैं कैसे बताउँ तुम्हारी उपयोगिता तुम्हारा सौन्दर्य अनुपम है सूरज भी तुम्हारे दरख्तों से झांक...
Rachnakunj .
Jan 3, 20241 min read


नसीहत
रमाशंकर पांडे ससुराल से दुखी होने के कारण छः महीने मायके रहने के बाद आज बेटी ससुराल जा रही थी। पिछले हफ्ते पिता ने कहा था, हम बूढ़े हो गए...
Rachnakunj .
Jan 2, 20242 min read


पिता का सम्मान
विभा गुप्ता "बाबूजी.., मुझे 'जिंदल एंटरप्राइज' में नौकरी मिल गई है।" खुशी-से चहकते हुए विमल ने अपने पिता को बताया तो वो सोच में पड़ गयें।...
Rachnakunj .
Dec 31, 20232 min read


अंधविश्वास
डॉ. पारुल अग्रवाल दिव्या अपने परिवार से प्रेम करने वाली स्त्री थी। पर उसमें एक खराबी थी कि वो थोड़ा अंधविश्वासी थी। आजकल उसके पति का काम...
Rachnakunj .
Dec 31, 20232 min read


चूल्हे
मंजू यादव 'किरण' मेरे साहब (पतिदेव) खाना खाकर सोफे पर बैठते हुए बड़े खुशनुमा मूड में थे, बोले, "आज तो खाने में मजा आ गया। खाना मेरी बहू...
Rachnakunj .
Dec 29, 20234 min read


बचपन ना छीने
विभा गुप्ता मेरे पति का जबलपुर में तबादला हुआ था। शहर और वहाँ के लोग, दोनों मेरे लिये नये थे। बेटे का जिस स्कूल में एडमिशन करवाया था, उसी...
Rachnakunj .
Dec 29, 20233 min read


हृदय परिवर्तन
रमाकांत अवस्थी गांव की एक खूबसूरत नवयुवती अपने तीन साल के बच्चे को चिड़ियाघर घुमा रही थी। वहीं पांच-सात कॉलेज के लड़के उसे बार-बार देखते...
Rachnakunj .
Dec 28, 20232 min read


चोर कौन
संगीता अग्रवाल "मिताली कहाँ हो तुम?" विनय ऑफिस से आते ही चिल्लाया। "अरे क्यों गरम हो रहे हो, क्या हुआ बताओ तो?" मिताली रसोई से निकल पूछने...
Rachnakunj .
Dec 28, 20232 min read


बेटा हो तो ऐसा
गीतांजलि गुप्ता पलाश बहुत खुश था। कई महीनों से नौकरी ढूंढ रहा था। एक साथ दो कम्पनियों से आये नियुक्ति पत्र ले माँ और पापा के पास आया,...
Rachnakunj .
Dec 25, 20231 min read


कसूर
हरिशंकर गोयल रोहित अपनी दुकान पर बैठा-बैठा मोबाइल में कुछ वीडियो देख रहा था। आजकल बहुत सारी लड़कियां पैसा कमाने के चक्कर में ऊलजलूल...
Rachnakunj .
Dec 25, 20235 min read


बेटी की चाह
निर्मला सिंह 40-42 साल की घरेलू स्त्री थी सुधा। भरापूरा परिवार था। धन-धान्य की कोई कमी नहीं थी। सुधा भी ख़ुश ही थी अपने घर-संसार में,...
Rachnakunj .
Dec 21, 20232 min read


साँवली
पुष्पा संजय नेमा रोज की तरह आज फिर सब ऑगन में बैठ कर सुबह की गुनगुनी धूप का आनन्द ले रहे थे। इतने में बाबूजी की कड़कदार आवाज से साँवली के...
Rachnakunj .
Dec 21, 20232 min read


एक हसरत थी कि....
रजनी माथुर एक लड़की होने के नाते मेरी भी एक इच्छा थी कि मुझे भी कोई छेड़े। मुझ पर नई-नई जवानी आई थी, नई इसलिए क्योंकि तब मैं स्कूल में थी...
Rachnakunj .
Dec 20, 20232 min read


पहाड़ों की परी
आनंद मिश्रा एक समय की बात है, हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों के बीच बसे एक अनोखे गाँव में मीरा नाम की एक लड़की रहती थी। वह अपनी हिरणी जैसी...
Rachnakunj .
Dec 20, 20235 min read


मूर्ख पड़ोसी
अनजान प्राचीन भारत में, एक बहुत ही दयालु व्यापारी रहता था। वह निर्धन लोगों को पैसे दान करता था और अपने दोस्तों की हमेशा मदद करता था। उस...
Rachnakunj .
Dec 19, 20232 min read


बैंड बाजे
निरंजन धुलेकर कोर्ट में हो गया फ़ैसला आज। दोनों बाहर आ गए, एक दूसरे के प्रति निर्विकार पर अपनी-अपनी जीत के विजयी भाव चेहरे पर लिए सड़क की...
Rachnakunj .
Dec 19, 20231 min read
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