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हमारी सोच
डॉ. कृष्ण कांत श्रीवास्तव एक बार एक राजा के राज्य में महामारी फैल गयी। चारो ओर लोग मरने लगे। राजा ने इसे रोकने के लिये बहुत सारे उपाय...
Rachnakunj .
Dec 18, 20232 min read


सगी बहन
दीपक पाराशर मोहन अपने तीन दोस्तों के साथ रोज की भांति स्कूल से वापिस घर जा रहा था कि तभी अचानक किसी लडकी के चीखने कि आवाज आई, बचाओ...
Rachnakunj .
Dec 18, 20232 min read


दो वादे
संजय नायक "शिल्प" ट्रेन अपनी गति से उसके गाँव की ओर बढ़ी चली जा रही थी। रंजना पूरे तेरह साल बाद गाँव जा रही थी। उसके पिताजी अपने अंतिम...
Rachnakunj .
Dec 16, 202310 min read


नई बहू
रीटा मक्कड़ वैसे भाभी तुमने बहु को ज्यादा ही सर पर चढ़ा रखा है। नीता ने अपनी भाभी से बोला। अभी से उसको काम करने की आदत नही डालोगी तो अकेले...
Rachnakunj .
Dec 16, 20231 min read


पंगा बड़ा महंगा
मीनाक्षी सिंह कल विवेक एक शादी समारोह में गया। वो एक चेयर लेकर बैठ गया और आतें ज़ाते लोगों को देखने लगा। तभी उसकी नजर सामने बैठे एक आदमी...
Rachnakunj .
Dec 15, 20233 min read


मेरी चारुलता
भोलानाथ लेकिन मां बार-बार टोकती कि रवीन्द्र शादी कर ले, लेकिन मैं ना कर देता इसका कारण थी चारुलता। जिसका जिक्र आते ही आंखें नम हो जाती...
Rachnakunj .
Dec 15, 20232 min read


हमारी बेटियाँ
माधवी दीक्षित मैं 8वीं कक्षा में थी जब मुझसे कहा गया, तुम पढ़ कर क्या करोगी? तुम्हारे भाइयों की शिक्षा अधिक महत्वपूर्ण है। उस दिन, मैंने...
Rachnakunj .
Dec 14, 20233 min read


रिक्शेवाला
लक्ष्मीकांत पांडे "जल्दी करो, जल्दी करो, देर हो रही है। कितनी देर लगाती हो एक टिफ़िन देने में" प्रफुल्ल बाबू ने झल्लाते हुए अपनी पत्नी...
Rachnakunj .
Dec 14, 20234 min read


माता का ह्रदय
प्रेमचंद माधवी की आंखों में सारा संसार अंधेरा हो रहा था। काई अपना मददगार दिखाई न देता था। कहीं आशा की झलक न थी। उस निर्धन घर में वह अकेली...
Rachnakunj .
Dec 11, 202312 min read


मां के पैर
धीरज झा सुबह ही सोचा था ऑफिस के रास्ते में जो भी कंजक मिलेगी उसके पैर छू लूंगा लेकिन हड़बड़ी में राइड बुक की, और निकल गया। सारा दिन काम...
Rachnakunj .
Dec 11, 20232 min read


हथौड़ी की कशमकश
कानपुर की तंग गलियों के बीच एक पुरानी ताले की दूकान थी। नागरिक वहां से ताला-चाबी खरीदते और कभी-कभी चाबी खोने पर डुप्लीकेट चाबी बनवाने भी...
Rachnakunj .
Dec 10, 20232 min read


केंचुआ
हरिशंकर परसाई वो इतवार की छुट्टी के दिन मरे। वेतन लेकर क्रिया-कर्म का खर्च छोड़कर और वसीयत लिखकर। वह जब जीवित थे, तब घर की सीढ़ी ऐसी...
Rachnakunj .
Dec 10, 20231 min read


सच्ची पूजा
विभा गुप्ता "सॉरी दीदी, आज घर में कुछ काम आ गया तो पैसे उसी में खर्च हो गये। कल पक्का आपका सारा बकाया मैं चुकता कर दूँगा।" हाथ जोड़कर...
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Dec 10, 20232 min read


बटवारा
डॉ. अश्वनी कुमार मल्होत्रा आज की कहानी एक संयुक्त परिवार की कहानी है। घर के मुख्य, आनंद स्वरुप अब वृद्ध हो चुके है, उन्हें हृदय रोग व...
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Dec 5, 20232 min read


मेरा कवि मेरा कमाल
(एक व्यंग) डॉ. जहान सिंह “जहान” आजकल कवि क्या कमाल करते हैं। शब्दों की भीड़ शब्दों का धरना शब्दों का प्रदर्शन कर साहित्य का ट्रैफिक जाम...
Rachnakunj .
Dec 5, 20231 min read


कवर
निरंजन धुलेकर बॉडी एक्सपोज़र और अंग प्रदर्शन पर पिता पुत्री में बात चीत हो रही थी, विषय ज़रा सेंसिटिव था और पीढ़ियों का अंतर भी साफ़ दिखाई पड़...
Rachnakunj .
Dec 4, 20231 min read


जाको राखे साइयां
डॉ ममता बहुत सालों पहले की बात है। मैं आई. सी. सी. यू. में जूनियर डॉक्टर की पोस्ट पर काम किया करती थी। अकसर शाम की ड्यूटी के खत्म होने से...
Rachnakunj .
Dec 4, 20232 min read


झूठा दिखावा
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव एक जंगल में बंदरों का बड़ा झुंड था। उस जंगल में खाने पीने की कोई कमी नहीं थी इसलिए सारे बंदर बहुत आराम और...
Rachnakunj .
Dec 3, 20233 min read


पश्चाताप
रमाकांत द्विवेदी राजीव अपनी कंपनी के किसी काम से अपनी ससुराल के नजदीकी शहर में गया था। काम खत्म होने के बाद जब वह वापस अपने गंतव्य की तरफ...
Rachnakunj .
Dec 3, 20234 min read


प्रेमा दीदी
सुधा श्रीवास्तव मैं जब नवी कक्षा में थी, तो मेरी हिंदी की अध्यापिका प्रेमा दीदी थीं। वह एकदम शुद्ध हिंदी बोलती थीं। वैसे तो वो बहुत सीधी...
Rachnakunj .
Dec 1, 20231 min read


नकल का अंजाम
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव एक पहाड़ की ऊंची चोटी पर एक गरुड़ रहता था। उसी पहाड़ की तलहटी में एक विशाल वृक्ष था, जिस पर एक कौआ अपना घोंसला...
Rachnakunj .
Dec 1, 20232 min read


विदाई
सुनीता मुखर्जी "श्रुति" रागिनी घर में बड़ी और राहुल छोटा था। दोनों में पांच-छः साल का अंतर था। श्यामा को घर की बहुत चिंता सताती थी। पति...
Rachnakunj .
Nov 30, 20233 min read


फल
नताशा हर्ष गुरनानी स्नेहा आज अपने दोनों जुड़वा बच्चो रोहन और अवनी की दसवीं के परीक्षा परिणाम की पत्री हाथ में लेके अतीत में खोई हुई थी।...
Rachnakunj .
Nov 30, 20232 min read


माँ का क़र्ज़
निशा अवस्थी एक बार बेटे और माँ में बहस शुरू हो गयी। बेटे ने माँ को कहा माँ, तू हमेशा यही कहती रहती है, कि माँ का कर्जा कभी नहीं उतर सकता।...
Rachnakunj .
Nov 29, 20233 min read
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