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गहरी रात
जसलीन रात हुई गहरी सी काली दूर हुई निसदिन लाली परिंदों ने पंख फड़फड़ाए नभ में भी तारे दिखलाये जुगनू निशा से बतियाते छिपते तो कभी चमचमाते...
Rachnakunj .
Oct 3, 20231 min read


बाऊजी की थाली
शिखा जैन बाऊजी के लिये खाने की थाली लगाना आसान काम नहीं था। उनकी थाली लगाने का मतलब था, थाली को विभिन्न पकवानों से इस तरह सजाना मानो ये...
Rachnakunj .
Oct 3, 20233 min read


मर्यादित रिश्ते
कविता भड़ाना चीखने की तेज आवाज़ के साथ कई लोगों की निगाहें उसी ओर उठ गई, एक सुंदर सी महिला ने एक पुरुष को कालर से पकड़ा हुआ था और बेहद...
Rachnakunj .
Oct 2, 20232 min read


बेइज्जती
रमा कांत शुक्ल धनबाद के पुराने बाजार के पास मैं एक विवाह में गया हुआ था। मैं बाहर बैठा था। डीजे बज रहा था और अंदर पार्टी चल रहा थी। अचानक...
Rachnakunj .
Oct 2, 20232 min read


भाजी वाली
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव एक भाजी वाली। रोज हमारे घर आती। बड़ी सी लाल बिंदी, करीने से बनाए बाल, और हाथ भर के चूडिय़ां। मम्मी के मुँह लगी...
Rachnakunj .
Oct 1, 20232 min read


क़दम मिला कर चलना होगा
अटल बिहारी वाजपेयी क़दम मिला कर चलना होगा बाधाएँ आती हैं आएँ घिरें प्रलय की घोर घटाएँ, पावों के नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,...
Rachnakunj .
Oct 1, 20231 min read


शिक्षक सम्मान
डॉ कृष्णकांत श्रीवास्तव "सुनो, आज चार तारीख हो गई, पेंशन लेने का समय आ गया है। बैंक जा रहा हूँ, आने में देर हो जाए तो परेशान मत होना।...
Rachnakunj .
Sep 29, 20232 min read


वो दूरी
गीता गुप्ता अक्सर मैं पूछती उनसे, अर्पिता जी आपका तलाक क्यों हुआ? हमेशा वो टाल जातीं। मुझे लगता शायद किसी लत का शिकार होगा या बेरोजगार।...
Rachnakunj .
Sep 28, 20231 min read


पांव के निशान
अंचल अग्रवाल कुछ दिन पहले एक परिचित के घर गया था। जिस वक्त घर में मैं बैठा था, उनकी नौकरानी घर की सफाई कर रही थी। मैं ड्राइंग रूम में...
Rachnakunj .
Sep 28, 20233 min read


खुशी के वो पल
सविता पाटील खुशी के वो पल, ज़िन्दगी में… कुछ इस तरह से दबें रहते हैं, जैसे समंदर की गहराइओं में… खजाने छिपे रहते हैं ! हम रहते हैं...
Rachnakunj .
Sep 25, 20231 min read


संगत का परिणाम
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव एक बार एक शिकारी शिकार करने एक जंगल में गया, दिनभर भटकने के बाद भी उसे शिकार नहीं मिला, थकान हुई और एक वृक्ष के...
Rachnakunj .
Sep 25, 20232 min read


जीवन का चक्र
रमाकांत शुक्ल विश्वा की नई-नई शादी हुई थी। ससुराल से एक महीने बाद जब वह वापस मायके लौटी। तो मां के सामने रोने लगी और बोली मां, मुझे किस...
Rachnakunj .
Sep 24, 20232 min read


पिता....
पिता.... तुम और मैं पति पत्नी थे, तुम माँ बन गईं मैं पिता रह गया। तुमने घर सम्भाला, मैंने कमाई, लेकिन तुम "माँ के हाथ का खाना" बन गई, मैं...
Rachnakunj .
Sep 24, 20231 min read


इनसे बचके रहना
डॉ ममता मुझे एक बात समझ नहीं आती। अगर किसी परिवार का शादीशुदा बेटा अच्छा नहीं कमाता तो उसकी पत्नी के साथ नौकरानी जैसा व्यवहार क्यों किया...
Rachnakunj .
Sep 23, 20233 min read


गुरु-शिष्य मिलन
मुकेश ‘नादान’ नरेंद्र के लिए रामकृष्ण देव का मन मानो नरेंद्रमय हो गया था। उनके मुख से नरेंद्र के गुणानुवाद के सिवाय और कोई दूसरी बात नहीं...
Rachnakunj .
Sep 23, 20233 min read


कमाई
अनुज सिंह एक बुढ़िया एक दिन हाथ में एक रुपया लेकर सेठ की दुकान पर गयी और काफी देर तक आते जाते ग्राहकों को देखती रही, जब सेठ की नजर उस...
Rachnakunj .
Sep 22, 20232 min read


लक्ष्य
नेतराम भारती अगर-मगर की तोड़ दिवारें, चल उठ जो भी ठाना है। स्वेद-लहू की बूँद-बूँद का, फल तुझको मिल जाना है। व्योम-शिखर तक होड़ लगाते,...
Rachnakunj .
Sep 22, 20231 min read


दायित्व बोध
चंद्रकांत आप गाड़ी लेकर निकलिए किसी भी त्यौहार पर, तो कुछ दृश्य आपको बहुतायत में मिल जायेंगे खासकर भाई-बहन वाले त्यौहारों पर, फिर चाहे वो...
Rachnakunj .
Sep 21, 20232 min read


धब्बा
संगीता अग्रवाल “जब तक आप दस लाख का इंतज़ाम नही करते फेरे नही होंगे।" जयमाला के बाद लड़के का पिता बेहयाई से बोला। "पर इतना पैसा अचानक कहाँ...
Rachnakunj .
Sep 21, 20232 min read


भाई-भाई
रमाकांत शुक्ल यूं तो वह दोनों बहनें हैं और खुशकिस्मती से दोनों सगे भाइयों से ब्याही गई थी। मगर शादी के बाद घर में दोनों देवरानी-जेठानी के...
Rachnakunj .
Sep 20, 20232 min read


लाडली बेटी
ऋतु सिंह सारा दिन घर में पड़ी रहती हो "एक काम ढंग से नहीं करना चाहती।" तुम्हें कितनी बार बोला है, मेरे तैयार होने से पहले नाश्ता टेबल पर...
Rachnakunj .
Sep 20, 20235 min read


गीत नहीं गाता हूँ।
अटल बिहारी वाजपेयी बेनक़ाब चेहरे हैं, दाग़ बड़े गहरे हैं टूटता तिलिस्म आज सच से भय खाता हूँ गीत नहीं गाता हूँ। लगी कुछ ऐसी नज़र बिखरा...
Rachnakunj .
Sep 19, 20231 min read


संस्कार
रूप किशोर श्रीवास्तव एक समय पर विजयगढ़ भारत का एक विशाल साम्राज्य था। वहां के राजा वीरेंद्र प्रताप सिंह बहुत ही दयालु प्रकृति के थे। उनके...
Rachnakunj .
Sep 19, 20233 min read


भाग्यवान
कविता भड़ाना सुलेखा कई दिनों से देख रही है कि उसकी छोटी बेटी रिया बहुत उदास और सबसे खींची-खींची सी रहने लगी है, पहले जहां सारा घर रिया की...
Rachnakunj .
Sep 18, 20232 min read
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