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लड़की हूँ,
वो गुलशन जो, खाद-धूप को,
पाकर भी, गुलज़ार नहीं हूँ
मैं वो सपना, जो आँखों में,
आकर भी साकार नहीं हूँ
जो देखा, जो जाना,
जो महसूस किया, लफ़्ज़ों में ढाला
मैने अपनी, बात कही बस,
मैं कोई, फ़नकार नहीं हूँ
हुस्न, मौसिकी, रंग, नज़ारे,
सब कुछ ही संसार हैं उसका
आँचल सक्सैना
1 day ago1 min read
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