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बबलू की मम्मी की अनोखी शादी की सालगिरह
बहुरानी का पार्सल? देखें तो हमारी बहु को हमसे कितना प्यार है? हे राम जे क्या? नींद की गोलियाँ वो भी पूरे हज़ार का बंडल? बबलू एक बात सुनो। तुम लोग रात भर इतनी खटर पट्टर मचाये रखते हो हमे सारी रात उठ उठ कर टोकना पड़ता है, सोते क्यूँ नही? बहु को भेज यहाँ ये सारी उसी को दे दूंगी। आ तो गए चिक्की डब्बू, अब तो चैन सोने दो मुझे, हद हो गई।
निरंजन धुलेकर
May 83 min read


रसीद का आखिरी नाम
रेखा जौहरी दिल्ली की गलियों में सुबह की हल्की रोशनी फैली थी। सड़क किनारे रसीद का छोले कुलचे वाला ठेला था, जिस पर टेढ़े-मेढ़े अक्षरों में लिखा था – “रसीद का छोले कुलचे”। रसीद के पास अपनी मां का दिया ताबीज, बाप की पुरानी साइकिल और ठेले का जंग लगा चम्मच ही उसकी पूरी दुनिया थी। रसीद कम बोलता था, लेकिन उसकी आँखों में अनगिनत कहानियाँ छिपी थीं। गली के बच्चे उसे ‘रसीद भाई’ कहते, कभी वो उन्हें मुफ्त में कुलचे देता, कभी कहानी सुनाता। हर रोज दोपहर को एक बूढ़ा आदमी वहाँ से गुजरता, साफ
रेखा जौहरी
Dec 5, 20253 min read
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