top of page
OUR BLOGS


रिश्ता रूह का
रात के तीसरे पहर में
तुम अपना सर रख कर विश्राम कर लेना यहाँ
क्योंकि अगले पहर
संसार का सूरज तुम्हें इसकी आज्ञा न दे शायद
और फिर
मेरी पीठ में नम पड़ते हुए
तमाम सूरज भी तो
अपने उगने की प्रतीक्षा में रहेंगे...
है ना....!!!
श्याम मुकर्जी
1 day ago2 min read
bottom of page