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एक रुपये का सिक्का
विवेकानन्द जी और उनकी पत्नी के चेहरे की खुशी देखते बन रही थी पर स्क्रीन के एक कोने में चुपचाप खड़ी दिख रही रंजीता की आंखों ने खुशी के आंसुओ को छिपाने से जैसे इनकार कर दिया था। पहले तो ऐसा मायका और अब ससुराल में ऐसे अनोखे परिवार को पाकर वो स्वयं को दुनिया की सबसे भाग्यशाली महिला समझ रही थी।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
May 273 min read


अधूरा वादा
आज सुबह से जगदिश प्रसाद बहुत खुश था, अपनी बरसों पुरानी साईकिल को ग्रीस, आयल लगाकर और सरसों का तेल लगाकर एकदम चकाचक करने में मशगूल था, उसे यूँ तल्लीन देख पत्नी ने उसे टोका, "इस बरसों से पड़ी खटारा को क्यों इतना चमका रहे हो,और भी बहुत काम पड़े हैं, उनमें हाथ बंटा दो।"
संजय नायक
Dec 17, 20253 min read


उम्मीद
अरविंद नौखवाल एक पुत्र अपने वृद्ध पिता को रात्रिभोज के लिये एक अच्छे रेस्टोरेंट में लेकर गया। खाने के दौरान वृद्ध पिता ने कई बार भोजन...
अरविंद नौखवाल
Jul 29, 20252 min read
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