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कर्म का सिद्धांत
समय बदलता रहता है। जब भगवान् को लेना होता है तो वह कुछ भी नहीं छोड़ते, और जब देना होता है तो छप्पर फाड़ कर देते हैं। और एक बार भगवान् चाहे माफ कर दे, परंतु कर्म माफ नहीं करते।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Jun 64 min read


बस स्टैंड की वह बच्ची…
लोभ में इतना मत लो कि किसी और का हिस्सा भी छीन लो। क्योंकि असली संपत्ति धन नहीं, वो संवेदना है… जो भूख में भी बाँटना जानती है।
ललिता सिंह
Mar 242 min read


छोटी बहन
मैंने कहा, "पापा, आप भी तो मेरी भलाई के लिए ही चिंतित थे।" पापा ने एक बार फिर से मुझे सीने से लगा लिया और इस बार मम्मी और छोटी बहन भी आकर मुझसे लिपट गईं।
दोस्तो, मुझे मेरे पापा ने बचपन से लेकर आज तक एक बात ही सिखाई है, "अकेली लड़की मौका नहीं, जिम्मेदारी होती है हमारी।
रमेश मिश्रा
Mar 54 min read
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