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एक रुपये का सिक्का
विवेकानन्द जी और उनकी पत्नी के चेहरे की खुशी देखते बन रही थी पर स्क्रीन के एक कोने में चुपचाप खड़ी दिख रही रंजीता की आंखों ने खुशी के आंसुओ को छिपाने से जैसे इनकार कर दिया था। पहले तो ऐसा मायका और अब ससुराल में ऐसे अनोखे परिवार को पाकर वो स्वयं को दुनिया की सबसे भाग्यशाली महिला समझ रही थी।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
May 273 min read
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