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मुफ़्त के गुब्बारे
सच तो यह है कि मैं केवल इतना चाहता हूँ कि किसी और पिता को अपनी बेटी को इस तरह खोने का असहनीय दुःख न सहना पड़े। अगर इन गुब्बारों के बाज़ार से गायब हो जाने से किसी एक मासूम की भी जान बच जाए, तो मुझे लगेगा कि मेरी बेटी की स्मृति व्यर्थ नहीं गई।"
अजीत कुमार
Jul 134 min read
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