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कद्दू की तीर्थयात्रा
जब तक हमारे व्यवहार व सोच में परिवर्तन नहीं होता है हमारी तीर्थ यात्रा अधूरी ही मानी जाती है। संस्कारों में आधारभूत परिवर्तन ही तीर्थ यात्रा का वास्तविक प्रतिफल है।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Feb 222 min read
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