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चरित्र की दृढ़ता
नरेंद्रनाथ चले गए। वह युवती भी हतबुद्धि होकर उन मित्रों के निकट लौटकर बोली, "एक साधू को लुभाने के लिए भेजकर आप लोगों ने खूब मजाक किया।" यह घटना एक ओर जिस प्रकार नरेंद्रनाथ के चरित्र की दृढ़ता दिखाती है, दूसरी ओर प्रमाणित करती है कि उनका मनोबल कितना दृढ़ था।
मुकेश ‘नादान’
3 days ago2 min read


उम्मीद का चिराग
”सबसे बड़ा सबक यह है कि कभी हिम्मत ना हारो। हालात कितने भी मुश्किल हों, अगर आप अपने रब पर भरोसा रखें और मेहनत जारी रखें, तो कोई ताकत आपके ख्वाब दफन नहीं कर सकती।”
तालियां बजने लगीं। समीना ने दिल ही दिल में दुआ की कि उसकी कहानी दूसरों के लिए उम्मीद का चिराग बने।
राम प्रसाद वर्मा
Jul 275 min read


चाट वाला
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव। एक चाट वाला था। जब भी उसके पास चाट खाने जाओ तो ऐसा लगता कि वह हमारा ही रास्ता देख रहा हो। हर विषय पर बात करने में उसे बड़ा मज़ा आता था। कई बार उसे कहा कि भाई देर हो जाती है, जल्दी चाट लगा दिया करो पर उसकी बात ख़त्म ही नहीं होती। एक दिन अचानक उसके साथ मेरी कर्म और भाग्य पर बात शुरू हो गई। तक़दीर और तदबीर की बात सुन मैंने सोचा कि चलो आज उसकी फ़िलासफ़ी भी देख ही लेते हैं। मैंने उससे एक सवाल पूछ लिया। मेरा सवाल उस चाट वाले से था कि, आदमी मेहनत से आगे
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Apr 51 min read


बिछुड़न
मिलना और बिछुड़ना दोनों
जीवन की मजबूरी है।
उतने ही हम पास रहेंगे,
जितनी हममें दूरी है।।
शाखों से फूलों की बिछुड़न
फूलों से पंखुड़ियों की।
आँखों से आँसू की बिछुड़न
होंठों से बाँसुरियों की।।
तट से नव लहरों की बिछुड़न
पनघट से गागरियों की।
सागर से बादल की बिछुड़न
बादल से बीजुरियों की।।
जंगल जंगल भटकेगा ही
जिस मृग पर कस्तूरी है।
सोनी शुक्ला
Jan 31 min read


पिता की दौलत
यह कहानी एक गहरी भावनात्मक और जीवन-मूल्य से भरी सामाजिक सच्चाई को उजागर करती है। कहानी की शुरुआत एक गांव में अकेले रह रहे बूढ़े पिता की मृत्यु से होती है। उनके दोनों बेटे, जो रोज़गार और भविष्य के लिए अलग-अलग शहरों में बस चुके थे, पिता के अंतिम संस्कार के लिए गांव आते हैं। सारे धार्मिक और सामाजिक कर्मकांड पूरे हो जाते हैं। गांव के कुछ लोग जा चुके होते हैं और कुछ अभी बैठे होते हैं, तभी बड़े भाई की पत्नी अपने पति के कान में कुछ फुसफुसाती है।
इसके बाद बड़े भाई अपने छोटे भाई को भी
श्रद्धा पटेल
Jan 23 min read
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