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दहेज की दीवार
अन्याय के सामने मौन रहना भी पीड़ित की वेदना बढ़ा सकता है। इसलिए सही समय पर सही बात कहने का साहस आवश्यक है। साथ ही, प्रायश्चित का अर्थ किसी दूसरे व्यक्ति पर अपना निर्णय थोपना नहीं; अपनी गलती स्वीकार करना, क्षमा मांगना और सुधार का मार्ग चुनना है। विवाह प्रेम, समानता और स्वतंत्र सहमति का संबंध है—सौदेबाजी का नहीं।
डॉ. शन्नो तिवारी
1 day ago12 min read
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