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लोभ का अथाह कुआँ
आवश्यकताओं की पूर्ति जीवन का स्वाभाविक हिस्सा है, लेकिन अधिक पाने की इच्छा जब विवेक, आत्मसम्मान और मानवीय मूल्यों पर हावी होने लगे, तब वही इच्छा बंधन बन जाती है। संतोष का अर्थ प्रयास छोड़ देना नहीं है। उसका अर्थ है—प्रयास करते हुए भी यह पहचान बनाए रखना कि किस उपलब्धि के लिए हमें क्या मूल्य चुकाना पड़ रहा है। क्योंकि लोभ के कुएँ से बाहर निकलने की पहली सीढ़ी है, यह स्वीकार करना कि हम उसमें उतर रहे हैं।
डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
Oct 89 min read


श्रद्धा से प्रकट हुए महादेव
भक्ति में दिखावे से अधिक भाव का महत्त्व है और शक्ति की वास्तविक शोभा विनम्रता में है। जिस हृदय में श्रद्धा और समर्पण का प्रकाश होता है, वहाँ साधारण वस्तु भी ईश्वर-स्मरण का माध्यम बन सकती है।
डॉ. कृष्णा कांत श्रीवास्तव
Sep 166 min read


स्कूल का गार्ड
एक दिन स्कूल में सुबह-सुबह कदम रखते ही गार्ड के मुरझाए और उदास चेहरे की ओर अचानक से ध्यान चला गया। लगभग 65-70 के बुजुर्ग को इस उम्र में अपना और परिवार का खर्च चलाने के लिए तीन शिफ्ट की ड्यूटी पूरी मुस्तैदी के साथ करनी पड़ती है। उस पर से न ढंग का भोजन, न कोई सुविधा और ना ही पदाधिकारियों का अच्छा बात-व्यवहार।
सपना रानी
Jan 44 min read
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