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नींव का पत्थर
नींव का पत्थर हूँ, दिखाई नहीं देता
इमारत की बुलंदी का मज़ा भरपूर लेता।
गहराई विचारों की, व्यक्तित्व की,
लम्हों की तो कभी अपनत्व की,
कहते सब हैं, समझते कम हैं,
गुजरते तो सब हैं पर कहते कम हैं।
साची सेठ
24 hours ago1 min read
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