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कैसे करूँ मैं कन्यादान
आज विदाई की बेला में,
समझ नहीं आता मुझको,
कैसे निकाल दूँ शरीर से,
अपने ही दिल को?
चाहती हूँ भूलना अतीत,
पर भुला नहीं पाती हूँ,
अनजाने ही अतीत की यादों में खो जाती हूँ।।
घर बाहर का टेंशन गुस्सा,
तुम पर ही तो उतारती थी,
पर मुस्कुराती थी तभी मैं
डॉ० शन्नो तिवारी
1 day ago2 min read
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