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मौन

सविता सिंह मीरा


मौन,
समझे कौन
उफ्फ ये शोर शराबा
शब्द सारे हो गए गौण।
तभी किसी ने दी आवाज
कौन है जो आया आज
इतने कोलाहल में भी
समझ गया वह सारे राज़।
देखा मुड़ के नहीं कोई पास
किस से मुझको,कैसा आस
अंतस ने दिया फिर दस्तक
तू खुद है खुद के लिए खास।
शब्द सारे हो गए मुखर
क्यूँ ताकू अब इधर उधर
पा लिया जब खुद को हमने
ये मिलन है सबसे सुंदर।

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