बेकरार दिलJan 22, 20231 min readप्रेम नारायणबहुत गंवाया मैंने तेरी बेखुदी सेकभी शोहरत मिली तो कभी बदनामी मिली सिर्फ तेरी नाकामी सेहमने न कभी चाहा था तेरी दुनियां से जुदा होनामगर क्या करूं आप तो खफा थे मेरी नादानी सेहाल अब बद से बदतर हुआ जा रहा है तुझसे दिल लगाने से नुकसान ही हुआ मेरी नादानी सेगैरों से धोखा खाए तो हम संभल गए मगर दोस्ती कर दुश्मनी क्यूं ये न समझ सके अपनी खामी सेचाहें तो ठुकरा दें मर्ज़ी है आपकी मगरकब तक ज़ुल्म जमा होगा अब हम न करेंगेशिकवा तुम्हीं सेबगावत का इल्म हममें नहीं क्या पता थावो दौर भी आएगा जब सामना होगा इक दूजे की नाकामी से*******
Behind the Scenes: The Creative Process at Rachnakunj<p>Poetry rarely arrives fully formed. Even when a line appears with startling clarity, it usually carries the weight of memory, revision, rhythm, and silence
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