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मंगल कामनाएँ

प्रतिभा गुप्ता

 

खिल उठीं पलकें सुनहरे
स्वप्न का प्रतिमान आया।
आस की लेकर नयीं
किरणें नया दिनमान आया।।
जिस तरफ देखो दुआओं
के गुलों की बारिशें हैं।
गीत ग़ज़लों के लिए
दिलकश नया उनवान आया।।
आइए वीरानियों को
चाँद-तारों से सजा लें।
तीरगी के घर उजाले सा
कोई मेहमान आया।।
धूप हो या छाँव कदमों
को न हर्गिज़ डगमगाना।
हौसलों का कोशिशों के
नाम है फरमान आया।।
इस बरस दिल की ज़मीं पर
सिर्फ़ खुशियाँ ही उगाना।
भूल जाना ग़म ग़मों के
दौर का अवसान आया।।
नफ़रतों को इस जहाँ से
काट फेंको इस जनवरी।
प्रेम का अमृत पिलाने
प्रेम का भगवान आया।।

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