माँ का सम्मान
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डॉ. कृष्णकांत श्रीवास्तव
एक वृद्ध माँ रात को लगभग साढ़े 11 बजे रसोई में बर्तन धो रही होती है। घर में दो बहुएँ हैं, जिन्हें बर्तनों की खटखट से नींद में खलल हो रहा होता है। बहुएँ अपने पतियों से कहती हैं कि अपनी माँ को समझाएं कि इतनी रात को बर्तन धोना बंद करें, क्योंकि इससे उनकी नींद उचट जाती है। इसके अलावा, माँ सुबह 4 बजे फिर से उठकर रसोई में खटपट शुरू कर देती हैं और फिर 5 बजे पूजा-अर्चना करके सबको जगाने लगती हैं। बहुएँ शिकायत करती हैं कि उन्हें रात में भी चैन नहीं मिलता और सुबह भी नहीं।
बड़ा बेटा, अपनी पत्नी की बात सुनकर, माँ को समझाने के लिए उठता है। वह रसोई की तरफ बढ़ता है, तभी उसे छोटे भाई के कमरे से भी वही बातें सुनाई देती हैं। वह छोटे भाई का दरवाजा खटखटाता है, और दोनों भाई रसोई में पहुँचते हैं। वहाँ पहुँचने पर, दोनों भाई माँ को बर्तन धोने से रोकते हैं और खुद माँ की मदद करने लगते हैं। माँ मना करती हैं, लेकिन वे नहीं मानते। बर्तन धोने के बाद, दोनों भाई माँ को प्यार से उनके कमरे तक लेकर जाते हैं। जब वे वहाँ पहुँचते हैं, तो देखते हैं कि पिता भी जागे हुए हैं।
दोनों बेटे माँ को पलंग पर बैठाकर कहते हैं, "माँ, कल सुबह हमें जल्दी उठा देना, हमें भी पूजा करनी है और पिताजी के साथ योगा भी करना है।" माँ यह सुनकर खुश होती हैं और कहती हैं, "ठीक है, बच्चों।" अगले दिन से दोनों बेटे सुबह जल्दी उठने लगते हैं, और रात को बर्तन भी खुद ही माँजने लगते हैं। जब बहुएँ यह देखती हैं, तो वे अपने पतियों से पूछती हैं, "माँ यह सब करती हैं, तो तुम क्यों कर रहे हो?" इस पर बेटे जवाब देते हैं, "हमारा विवाह इसलिए हुआ था ताकि माँ को मदद मिल सके, लेकिन जब तुम यह काम नहीं कर रही हो, तो हम अपनी माँ की मदद करेंगे। इसमें कोई बुराई नहीं है, आखिर वे हमारी माँ हैं।"
तीन दिनों के भीतर घर का माहौल बदलने लगता है। बहुएँ जल्दी से बर्तन माँजने लगती हैं, ताकि उनके पतियों को ये काम न करना पड़े। वे सुबह भी अपने पतियों के साथ उठने लगती हैं और पूजा-अर्चना में शामिल होने लगती हैं। कुछ दिनों में घर का पूरा वातावरण बदल जाता है। अब बहुएँ सास-ससुर को पूरा सम्मान देने लगती हैं, और परिवार में सामंजस्य स्थापित हो जाता है।
सार : माँ का सम्मान तब कम नहीं होता जब बहुएँ उनका सम्मान नहीं करतीं, बल्कि माँ का सम्मान तब कम होता है जब बेटे अपनी माँ का सम्मान नहीं करते या उनके काम में सहयोग नहीं करते। माता-पिता से जुड़ा नाता जन्म से होता है, और उनका सम्मान करना हमारी प्राथमिक जिम्मेदारी है।
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