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मातृभाषा की मौत

  • Jul 14, 2024
  • 1 min read

जसिंता केरकेट्टा

 

माँ के मुँह में ही
मातृभाषा को क़ैद कर दिया गया
और बच्चे
उसकी रिहाई की माँग करते-करते
बड़े हो गए।
मातृभाषा ख़ुद नहीं मरी थी
उसे मारा गया था
पर, माँ यह कभी न जान सकी।
रोटियों के सपने
खाने वाली संभावनाओं के आगे
अपने बच्चों के लिए उसने
भींच लिए थे अपने दाँत
और उन निवालों के सपनों के नीचे
दब गई थी मातृभाषा।
माँ को लगता है आज भी
एक दुर्घटना थी
मातृभाषा की मौत।

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