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मेरी बुद्धि

  • Dec 12, 2025
  • 2 min read

अशोक कुमार गर्ग

पुराने समय में एक राजा का फलों का बहुत बड़ा बाग था। बाग में अलग-अलग तरह के फल लगे थे। बाग का माली रोज राजा के लिए ताजे फल टोकरी में लेकर जाता था।

एक दिन बाग में नारियल, अमरूद और अंगूर पक गए। सेवक सोचने लगा कि आज कौन सा फल राजा के लिए लेकर जाना चाहिए। बहुत सोचने के बाद उसने अंगूर तोड़े और टोकरी में भर लिए। टोकरी लेकर वह राजा के पास पहुंच गया।

सेवक ने अंगूर की टोकरी ले जाकर राजा के सामने रख दी। राजा उस राज्य की समस्याओं की वजह से बहुत चिंतित थे। सेवक भी वहीं बैठ गया। राजा सोचते-सोचते टोकरी में से एक-एक अंगूर उठाता, कुछ खाता और कुछ सेवक के ऊपर फेंक रहा था।

हर बार राजा का फेंका हुआ अंगूर सेवक को लग रहा था। लेकिन, सेवक हर बार यही कहता कि भगवान तू बड़ा दयालु है। जो होता है, अच्छे के लिए होता है।

कुछ देर बाद राजा का ध्यान सेवक पर गया। वह बोल रहा था भगवान तू बड़ा दयालु है। जो होता है, अच्छे के लिए होता है। ये सुनते ही राजा ने उस सेवक से पूछा कि मैं तुम्हारे ऊपर बार-बार अंगूर फेंक रहा हूं और तुम्हें गुस्सा नहीं आ रहा है? और तुम भगवान को दयालु क्यों कह रहे हो?

सेवक बोला कि राजन् आज हमारे बाग में नारियल, अमरूद और अंगूर तीन फल पके थे। मैं सोच रहा था कि आपके लिए आज क्या लेकर जाऊं? तभी मुझे लगा कि आज अंगूर लेकर जाना चाहिए। अगर मैं नारियल या अमरूद लेकर आता तो अभी मेरा हाल बुरा हो जाता। इसीलिए में भगवान को दयालु कह रहा हूं।

फल लेकर आते समय भगवान ने मेरी बुद्धि ऐसी कर दी कि मैं आपके लिए अंगूर लेकर आ गया। इसीलिए कहते हैं जो होता है, अच्छे के लिए होता है। निस्वार्थ भाव से भक्ति करने वाले लोगों का मन शांत रहता है और सोचने-समझने की शक्ति बढ़ती है।

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