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स्कूल का गार्ड
एक दिन स्कूल में सुबह-सुबह कदम रखते ही गार्ड के मुरझाए और उदास चेहरे की ओर अचानक से ध्यान चला गया। लगभग 65-70 के बुजुर्ग को इस उम्र में अपना और परिवार का खर्च चलाने के लिए तीन शिफ्ट की ड्यूटी पूरी मुस्तैदी के साथ करनी पड़ती है। उस पर से न ढंग का भोजन, न कोई सुविधा और ना ही पदाधिकारियों का अच्छा बात-व्यवहार।
सपना रानी
Jan 44 min read


पिता की दौलत
यह कहानी एक गहरी भावनात्मक और जीवन-मूल्य से भरी सामाजिक सच्चाई को उजागर करती है। कहानी की शुरुआत एक गांव में अकेले रह रहे बूढ़े पिता की मृत्यु से होती है। उनके दोनों बेटे, जो रोज़गार और भविष्य के लिए अलग-अलग शहरों में बस चुके थे, पिता के अंतिम संस्कार के लिए गांव आते हैं। सारे धार्मिक और सामाजिक कर्मकांड पूरे हो जाते हैं। गांव के कुछ लोग जा चुके होते हैं और कुछ अभी बैठे होते हैं, तभी बड़े भाई की पत्नी अपने पति के कान में कुछ फुसफुसाती है।
इसके बाद बड़े भाई अपने छोटे भाई को भी
श्रद्धा पटेल
Jan 23 min read


हादसा
संगीता अग्रवाल हैदराबाद की भीड़भाड़ भरी गलियों में एक मासूम बच्चा आर्यन फुटपाथ पर बैठा था। उसकी उम्र मुश्किल से 8 साल थी, लेकिन उसके चेहरे पर बचपन की मासूमियत से ज्यादा भूख और बेबसी की लकीरें साफ नजर आती थीं। फटे कपड़े, नंगे पैर और खाली आंखों में हजारों सपने। आर्यन कभी अपने माता-पिता के साथ एक छोटे से किराए के कमरे में रहता था। उसके पिता सत्यपाल मजदूरी करते थे और मां सुनीता सिलाई करती थीं। गरीब जरूर थे, लेकिन बेटे के लिए बड़े-बड़े सपने थे। सत्यपाल हमेशा कहते थे - ”आर्यन पढ़
संगीता अग्रवाल
Dec 24, 20253 min read


मेरी बुद्धि
पुराने समय में एक राजा का फलों का बहुत बड़ा बाग था। बाग में अलग-अलग तरह के फल लगे थे। बाग का माली रोज राजा के लिए ताजे फल टोकरी में लेकर जाता था।
एक दिन बाग में नारियल, अमरूद और अंगूर पक गए। सेवक सोचने लगा कि आज कौन सा फल राजा के लिए लेकर जाना चाहिए। बहुत सोचने के बाद उसने अंगूर तोड़े और टोकरी में भर लिए। टोकरी लेकर वह राजा के पास पहुंच गया।
अशोक कुमार गर्ग
Dec 12, 20252 min read


मोची की कहानी
संगीता जैन किसी शहर में एक मोची रहा करता था। उसके घर के पास ही उसकी एक छोटी-सी दुकान थी। उस दुकान में वह मोची जूते बनाने का काम करता था। तैयार जूतों को बेचकर जो भी पैसे मोची के हाथ लगते उन्हीं से वह अपने परिवार का पेट पालता था। हालांकि, मोची अपना काम बड़ी मेहनत और लगन से करता था, लेकिन धीरे-धीरे उसके जूते खरीदने वालों की संख्या कम होने लगी। ऐसे में उसे कम दाम पर अपने तैयार जूतों को बेचना पड़ता था। इसका नतीजा यह हुआ कि समय के साथ उसका सारा जमा पैसा भी खत्म हो चला। नौबत यह आ गई
संगीता जैन
Dec 8, 20254 min read
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