top of page

मेरी याद

17 hours ago
1 min read

संगीता शर्मा

 

जब इस वक़्त को बीते अरसे हो जायँगे!

जब ये लम्हें दूर कहीं खो जाएँगे,

तब कहीं धुंधली सी,

अपनी किसी कविता की शक्ल में दिखूँगी मैं तुम्हे!

पढ़ लेना तब अगर मन करे!

जब रातों को हवा के झोंके

तुम्हे मेरा एहसास कराएँगे

और बेतरतीब बेबाक

मेरी ये हर बात तुम्हे याद दिलाएंगे!

तब कोशिश करना सुनने की मुझे तुम,

जब तुम्हारे मंजिल से ज्यादा

करीब तुम्हे रास्ते हो जायेंगे!

तब याद करना तुम सफ़र में किसी मुझे,

मैं हमसफ़र बनके मिलूँगी तुम्हे!!

जब यूँ ही एक दिन मेरी याद आ जाये!

आँखें मूँद लेना, तुझमें ही हँसूँगी मैं!!

******

Comments


bottom of page