top of page

वो नारी

  • 11 hours ago
  • 1 min read

डॉ रीमा सिन्हा

 

मैंने देखा है अक्सर

उन औरतों को रोते हुए

जो दिल से सोचती हैं।

देखा है अक्सर उन्हें,

उपेक्षित होते हुए

जो सबका ख्याल रखती हैं।

मैंने देखा है उन्हें बहुत कुछ गढ़ते हुए,

जो स्वयं अनगढ़ रह जाती हैं।

मैंने देखा है उन्हें सदा अकेले रहते हुए,

जो सबको साथ लेकर चलती हैं।

मैंने देखा है अक्सर उन औरतों को ख़ुश,

जो हर तरफ कदम रखती हैं,

मैंने देखा है सफलता के पायदान चढ़ते हुए,

जो सबसे झूठे अपनापन का दम्भ भरती हैं।

कितनी ख़ुश रहती है वो नारी,

जो सिर्फ ख़ुद के लिए जीती है,

कितनी मीठी चिकनी चुपड़ी बातों से,

सबका मन मोह लेती है।

हाँ,बहुत कड़वी होती हैं सच्ची औरतें,

तभी तो हर झूठ पर ताने मारती हैं।

लेकिन निभाती भी हैं उसी रिश्ते को,

नहीं जी सकती उनके बिन, वो ये जानती हैं।

कितना कुछ करती हैं सिर्फ एक रिश्ते के लिए,

बेवकूफ़ होती हैं सच्ची औरतें,

उस एक रिश्ते में स्वयं बँध जाती हैं,

और अपेक्षा की चंद ख्वाहिशों में,

जीते जी स्वयं मर जाती हैं।

*******

Comments


bottom of page