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वो नारी
कितना कुछ करती हैं सिर्फ एक रिश्ते के लिए,
बेवकूफ़ होती हैं सच्ची औरतें,
उस एक रिश्ते में स्वयं बँध जाती हैं,
और अपेक्षा की चंद ख्वाहिशों में,
जीते जी स्वयं मर जाती हैं।
डॉ रीमा सिन्हा
Apr 31 min read


रिश्ता रूह का
रात के तीसरे पहर में
तुम अपना सर रख कर विश्राम कर लेना यहाँ
क्योंकि अगले पहर
संसार का सूरज तुम्हें इसकी आज्ञा न दे शायद
और फिर
मेरी पीठ में नम पड़ते हुए
तमाम सूरज भी तो
अपने उगने की प्रतीक्षा में रहेंगे...
है ना....!!!
श्याम मुकर्जी
Mar 272 min read
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