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हादसे

रीनू


तेरे शहर में हादसे होते रहे,
बेफिक्र हम तो चैन से सोते रहे l
इंतजार में कटती रही ये जिन्दगी,
यूं आह भर भर रात दिन रोते रहे l
उसकी नजर सीधी पड़े तो गुल खिले,
गर वो खफा फिर भार ही ढोते रहे।
अपनी खुशी कायम रहे बस इसलिये,
कांटें किसी की राह में बोते रहें।
बढ़ने लगे शिकवे गिले यूं बेसबब,
बैचैन से हम होश ही खोते रहे l
हमको समझ आयी नहीं तेरी अदा,
रीनू भला क्यो ये सितम होते रहे l
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